जेडीए एसटीपी और सीईपीटी की ऑनलाइन कर रहा मॉनिटरिंग

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जेडीए एसटीपी और सीईपीटी की ऑनलाइन कर रहा मॉनिटरिंग


जयपुर, 05 मार्च (हि.स.)। शहर में प्रदूषित पानी को ट्रीटेट करने के लिए बनाए गए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी)

और कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईपीटी) की जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जा रही है। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियत्रंण मंडल के निर्देश पर जेडीए ने शहर में चल रहे एसटीपी और सीईपीटी पर ऑनलाइन मॉनिटरिंग डिवाइस लगाए है। इन पर करीब साढ़े तीन करोड़ रुपए खर्च किए गए है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक डिवाइस के माध्यम से एसटीपी और सीईटीपी पर सीधे राजस्थान राज्य प्रदूषण नियत्रंण मंडल और केंद्रीय प्रदूषण नियत्रंण मंडल की जद में आ गए है। अब अगर कोई एसटीपी और सीईटीपी तय मानक से कम का पानी द्रव्यवती नदी में छोड़ता पाया जाता है तो उन पर दोनों मंडल कार्रवाई कर सकेंगे। खास बात यह है कि जेडीए प्रशासन भी इन डिवाइस के माध्यम से एसटीपी और सीईटीपी पर निगरानी रख पा रहा है।

राजधानी में जेडीए के अधीन 9 एसटीपी और एक सीईटीपी है। अब तक इसकी मॉनिटरिंग के लिए प्रदूषण नियत्रंण मंडल के अधिकारियों को मौके पर जाना पड़ता था इससे आर्थिक के साथ समय भी बर्बाद होता था। शहर में द्रव्यवती नदी सहित अलग-अलग स्थानों पर एसटीपी और इमली फाटक के पास सीईटीपी बना हुआ है। इनके माध्यम से प्रदूषित पानी को साफ कर सीधे नदी और नालों में छोड़ा जाता है। इन सभी एसटीपी और सीईपीटी की देखभाल सहित अन्य खर्चो के रुपए में जेडीए हर साल लाखों रुपए खर्च करता है।

शहर में जेडीए के अलावा नगर निगम और रीको द्वारा भी एसटीपी और सीईटीपी का संचालन किया जाता है। नगर निगम द्वारा देहलावास एसटीपी को अपग्रेड किया जा चुका है। इसके अलावा जयसिंहपुरा एसटीपी को अपग्रेड करने का काम किया जा रहा है। इसके अलावा सीतापुरा सहित अन्य औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाले प्रदूषित जल को साफ करने के लिए एसटीपी और सीईटीपी संचालित किए जा रहे है। इन सभी की निगरानी राजस्थान राज्य प्रदूषण नियत्रंण मंडल करता है। एसटीपी और सीईटीपी संचालन में लापरवाही और गंदा पानी बाहर छोडऩे पर प्रदूषण नियत्रंण मंडल कार्यवाही करते है।

शहर में निगम और जेडीए के अधीन करीब 1200 से अधिक पार्क है। एसटीपी के नजदीक वाले पार्को में यहां पर साफ किए जा रहे पानी का ग्रीनरी बढ़ाने में उपयोग किया जा रहा है। देहलावास एसटीपी से पार्को तक पानी की पाइप लाइन भी बिछाई हुई है। देहलावास एसटीपी से प्रतापनगर व उसके आस-पास के पार्को को पानी दिया जा रहा है। इसके अलावा पेड़-पौधों में पानी देने के लिए टेंकर भी भरे जा रहे है। सेंट्रल पार्क सहित कुछ अन्य पार्को में जेडीए के एसटीपी और सीईटीपी का पानी उपयोग में लिया जा रहा है। विशेष बात यह है कि जयपुर का गिरता जलस्तर चिंता का विषय बना हुआ है और जयपुर का बड़ा हिस्सा डार्क जोन में शामिल है। ऐसे में सीईटीपी और एसटीपी के पानी का उपयोग करना लाभदायक साबित हो रहा है। आने वाले समय में जेडीए और निगम इसका दायरा बढ़ाएंगे। वहीं जयसिंहपुरा में एसटीपी को अपग्रेड करने के बाद आठ गांवों को खेती के लिए पानी देगा। इसके लिए पाइप लाइन बिछाने का काम चल रहा है।

जेडीए एईएन राजीव बंसल ने बताया कि एसटीपी की ऑनलाइन माॅनिटरिंग की जा रही है इसका फायदा प्रदूषण नियत्रंण मंडल के साथ पानी की गुणवता पर पकड़ बढ़ी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश

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