बारिश ने खोली विकास कार्यों की पोल, जयपुर में सड़कें धंसीं, जलभराव और गड्ढों से बढ़ी परेशानी
जयपुर, 03 जुलाई (हि.स.)। राजधानी जयपुर में मानसून की पहली प्रभावी बारिश ने विकास कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सड़क धंसने, गहरे गड्ढे बनने, सीवरेज उफान मारने और जलभराव जैसी समस्याएं सामने आने लगी हैं। लगातार हो रहे निर्माण और खुदाई कार्यों के बाद सड़कों की समुचित मरम्मत नहीं होने का खामियाजा अब आमजन को भुगतना पड़ रहा है।
बारिश के बाद नगर निगम मुख्यालय के सामने, टोंक रोड, मानसरोवर, सिरसी रोड, सांगानेर सहित कई इलाकों से सड़क धंसने और जलभराव की शिकायतें जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए), नगर निगम और राजस्थान हाउसिंग बोर्ड तक पहुंचने लगी हैं। हालांकि शिकायतों के निस्तारण की गति फिलहाल धीमी बनी हुई है। जानकारों का मानना है कि यदि बारिश का दौर तेज हुआ तो ऐसे मामलों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
शहर के कई हिस्सों में करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़कें पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त होने लगी हैं। अनेक स्थानों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिनमें बारिश का पानी भर जाने से वाहन चालकों और राहगीरों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। जलभराव के कारण गड्ढे दिखाई नहीं देने से हादसों की आशंका बनी हुई है। वहीं कई क्षेत्रों में सीवरेज लाइनें उफान मारने लगी हैं, जिससे गंदा पानी सड़कों पर फैल गया। इससे यातायात प्रभावित हुआ और लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि विभिन्न एजेंसियों द्वारा बार-बार सड़कों की खुदाई तो की जाती है, लेकिन बाद में तकनीकी मानकों के अनुरूप उनकी मरम्मत नहीं की जाती।
विशेषज्ञों का मानना है कि भूमिगत पाइपलाइन, सीवरेज अथवा अन्य निर्माण कार्यों के बाद यदि सड़कों का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्निर्माण नहीं किया जाए तो मानसून के दौरान सड़क धंसने और गड्ढे बनने जैसी समस्याएं स्वाभाविक हैं। इसके लिए संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय, गुणवत्ता की निगरानी और समय पर रखरखाव आवश्यक है।
मौसम विभाग ने आगामी दिनों में जयपुर सहित प्रदेश के कई हिस्सों में वर्षा गतिविधियां बढ़ने की संभावना जताई है। ऐसे में यदि संबंधित विभागों ने समय रहते क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत, जल निकासी व्यवस्था और सीवरेज सिस्टम को दुरुस्त नहीं किया तो हालात और गंभीर हो सकते हैं तथा सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम भी बढ़ सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश

