अकीदत और अमन के माहौल में मनाया गया योमे आशूरा, 350 ताजियों के जुलूस निकले

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अकीदत और अमन के माहौल में मनाया गया योमे आशूरा, 350 ताजियों के जुलूस निकले


जयपुर, 26 जून (हि.स.)। इस्लाम धर्म के पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में शुक्रवार को राजधानी जयपुर में योमे आशूरा अकीदत, गम और अमन के माहौल में मनाया गया। शहरभर से करीब 350 छोटे-बड़े ताजियों के जुलूस निकले, जिनमें हजारों अकीदतमंद शामिल हुए। देर रात सभी ताजियों को रामगढ़ मोड़ स्थित कर्बला में धार्मिक परंपरा के अनुसार सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

दोपहर बाद शहर के विभिन्न मोहल्लों से ताजियों का निकलना शुरू हुआ। सभी ताजिए बड़ी चौपड़ पहुंचे, जहां से हवामहल बाजार, चांदी की टकसाल, सुभाष चौक, जोरावर सिंह गेट और रामगढ़ मोड़ होते हुए कर्बला रवाना हुए। जुलूस के दौरान विभिन्न अंजुमनों ने नौहाख्वानी और मातम किया। कई स्थानों पर युवाओं ने हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में छुरियों से मातम किया, जबकि पट्टेबाजों ने तलवार, बरछी और मुगदर से पारंपरिक करतब प्रस्तुत कर शहीद-ए-कर्बला को श्रद्धांजलि दी। जुलूस मार्ग पर बड़ी संख्या में लोगों ने ताजियों के दर्शन किए और स्वागत किया।

योमे आशूरा के अवसर पर शहर के विभिन्न हिस्सों में हिंदू संगठनों ने ताजियों पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। इस दौरान साम्प्रदायिक सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल देखने को मिली। चीनी की बुर्ज, बाबू का टीबा, पचरंग पट्टी ईदगाह, हसनपुरा, मावतान, जालूपुरा, नीलगरान, नालबंदान, सिरकीगरों, पन्नीगरान, मछली वाला, पहलवानों और अन्य क्षेत्रों के ताजिए आकर्षण का केंद्र रहे। जयपुर के शाही परिवार के सोने और चांदी के ताजिए भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण रहे।

ताजिया निर्माता सलीम ने बताया कि एक ताजिया तैयार करने में डेढ़ से दो लाख रुपये तक का खर्च आता है और इसे बनाने में करीब दो माह का समय लगता है। उन्होंने कहा कि जयपुर के ताजिए देशभर में प्रसिद्ध हैं और अकीदतमंद इन्हें अपनी मन्नतों से जोड़कर देखते हैं। इससे पहले गुरुवार देर रात 'कत्ल की रात' पर शहरभर के इमामबाड़ों और धार्मिक स्थलों पर मजलिसों का आयोजन हुआ। नौहाख्वानी के माध्यम से शहीद-ए-कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश की गई और इमाम हुसैन जिंदाबाद के नारों से माहौल गूंज उठा।

आयोजन को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस और जिला प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की। शहरभर में करीब तीन हजार पुलिसकर्मियों और अधिकारियों की तैनाती की गई। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल, सादा वर्दी में इंटेलिजेंस कर्मी, क्विक रिस्पॉन्स टीम (क्यूआरटी) और इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (ईआरटी) को तैनात किया गया। अभय कमांड सेंटर, सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के माध्यम से पूरे आयोजन की निगरानी की गई। सोशल मीडिया पर भी विशेष नजर रखी गई।

यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए परकोटा क्षेत्र में व्यापक ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया। कई प्रमुख मार्गों पर भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक रही तथा बड़ी चौपड़, चौड़ा रास्ता, जौहरी बाजार, बापू बाजार, हवामहल बाजार, सुभाष चौक, रामगंज बाजार, चांदपोल बाजार, एमआई रोड और अन्य प्रमुख बाजारों में पार्किंग प्रतिबंधित रखी गई। प्रशासन ने केवल लाइसेंसधारी ताजियों को ही जुलूस निकालने की अनुमति दी थी। सुरक्षा कारणों से 17 ताजियों के लाइसेंस पूर्व में निरस्त किए गए थे। आयोजन के दौरान बिजली, पेयजल और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गई थीं।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

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