जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में भारतीय भाषाओं पर रहेगा विशेष फोकस

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जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में भारतीय भाषाओं पर रहेगा विशेष फोकस


जयपुर, 28 अक्टूबर (हि.स.)। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के 20वें संस्करण की तैयारियां तेज हो गई हैं। वेदांता की प्रस्तुति वाले इस उत्सव का आयोजन 14 से 18 जनवरी 2027 तक जयपुर के होटल क्लार्क्स आमेर में होगा। आयोजकों ने बुधवार को वक्ताओं की दूसरी सूची जारी की, जिसमें अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लेखक, इतिहासकार, वैज्ञानिक, सांस्कृतिक विचारक और सामाजिक विषयों के विशेषज्ञ शामिल हैं।

नई सूची में इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार के लिए नामांकित फिलिस्तीनी लेखिका अदानिया शिब्ली, मानव विकास एवं पुरातत्व विशेषज्ञ एलिस रॉबर्ट्स, भारतीय बौद्धिक इतिहास की विद्वान अनन्या वाजपेयी और पुलित्जर पुरस्कार विजेता जीवनीकार बेंजामिन मोज़र प्रमुख हैं। हार्वर्ड की प्रोफेसर एवं इतिहासकार कैरोलिन एल्किंस, उपन्यासकार क्लेयर मेसुड, पुरातत्वविद् एरिक क्लाइन, संघर्ष समाधान विशेषज्ञ गाब्रिएल रिफाइंड और आदिवासी पहचान पर लेखन के लिए चर्चित हंसदा सोवेंद्र शेखर भी विभिन्न सत्रों में विचार रखेंगे।

इसके अलावा मराठी नाटककार मकरंद साठे, अकादमिक विद्वान मीरा सियो, कवयित्री मोना अर्शी, ब्रिटिश म्यूजियम के पूर्व निदेशक एवं कला इतिहासकार नील मैकग्रेगर और मलयाली लेखक पॉल ज़कारिया भी फेस्टिवल में शामिल होंगे।

वक्ता सूची में साहित्य से इतर कई विषयों को भी जगह दी गई है। शेफ एवं लेखिका रितु डालमिया, पर्सनल ग्रोथ कोच रक्सी नफौसी, हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रीराम नेने और नोबेल पुरस्कार विजेता आनुवंशिकीविद् सर पॉल नर्स अपने अनुभव साझा करेंगे। ‘कास्ट मैटर्स’ के लेखक सूरज येंडे, पूंजीवाद के इतिहासकार स्वेन बेकर्ट, लेखक-कवि ताबिश खैर, भाषाविद् थांगजाम हिंदुस्तानी देवी, अक्षता मूर्ति, पत्रकार मिशाल हुसैन और कला इतिहासकार विशाखा एन. देसाई भी वक्ताओं में शामिल हैं।

टीमवर्क आर्ट्स के प्रबंध निदेशक संजॉय के. रॉय ने कहा कि पिछले दो दशकों में साहित्य, इतिहास, विज्ञान और दर्शन जैसे विषयों ने फेस्टिवल की जिज्ञासा और खोज की भावना को आकार दिया है। उनके अनुसार, ऐसे समय में जब दुनिया को सार्थक संवाद की आवश्यकता है, यह मंच विभिन्न संस्कृतियों और सीमाओं के पार लोगों को जोड़ने का काम करता है।

फेस्टिवल के सह-निदेशक एवं इतिहासकार विलियम डेलरिम्पल ने भारत की कहानी कहने और बौद्धिक आदान-प्रदान की परंपरा को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने को महत्वपूर्ण बताया। वहीं, लेखिका एवं सह-निदेशक नमिता गोखले ने कहा कि 20वां संस्करण नए विचारों और तकनीकी बदलावों के प्रति खुला रहेगा तथा शास्त्रीय परंपराओं से भी जुड़ा होगा। उन्होंने भारतीय भाषाओं की विविधता पर विशेष ध्यान देने की बात कही। इसके तहत विभिन्न भारतीय भाषाओं के लेखक सत्रों और परिचर्चाओं में हिस्सा लेंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

Livevns.news Desk
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