सलाह नहीं, सहयोग की रखें भावना - डॉ. पाण्डे

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सलाह नहीं, सहयोग की रखें भावना - डॉ. पाण्डे


उदयपुर, 10 मई (हि.स.)। इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. बालमुकुंद पाण्डे ने आह्वान किया है कि समय अब सलाह का नहीं, सहयोग का है। संगठन से जुड़ने वाले हर सदस्य को उत्सव मूर्ति की तरह नहीं, बल्कि सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में अपना योगदान देना चाहिए।

डॉ. पाण्डे रविवार को यहां प्रताप गौरव केन्द्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ के पद्मिनी सभागार में इतिहास संकलन समिति चित्तौड़ प्रांत की कार्यकरिणी के त्रैवार्षिक चुनाव से पूर्व बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इतिहास संकलन योजना का मूल कार्य भारतीय ज्ञान परम्परा की श्रेष्ठता को पुनर्स्थापित करना है और इसी लक्ष्य को सामने रखकर हर सदस्य, हर कार्यकर्ता अपनी भूमिका का निर्धारण और निर्वहन करे। भारत के गौरवशाली, स्वाभिमानी, शौर्यपूर्ण इतिहास को पुनः जन-जन के मानस पटल पर स्थापित करने के लिए अभी कड़ी तपस्या करनी होगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे संगठन के लिए समय का दान करें।

भारत माता व इतिहास पुरुष के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ आरंभ हुई बैठक की अध्यक्षता करते हुए इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संरक्षक प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने धर्मो रक्षति रक्षितः श्लोक को उद्धृत करते हुए कार्यकर्ताओं से सत्य, न्याय, कर्तव्य परायण, सदाचारी व्यक्तित्व निर्माण पर बल दिया।

दो सत्रों में हुई इस बैठक के दूसरे सत्र में प्रांत अध्यक्ष प्रो. जीवन सिंह खरकवाल ने तीन साल का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। साथ ही आह्वान किया कि हमें अपने बुजुर्गों की कहानियों को सुनकर संकलित करना होगा, यही भारत के मूल इतिहास के संकलन का मार्ग प्रशस्त होगा।

इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय मंत्री प्रो. शिव कुमार मिश्रा ने दायित्ववान कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि दायित्व कैसा भी हो, वे अपने कार्य से उस दायित्व को महत्वपूर्ण बनाकर उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि विदेशों मंे भी भारत के इतिहास को पढ़ा जा रहा है, ऐसे में हमें भारत राष्ट्र के स्वाभिमानी इतिहास को दुनिया के सामने रखना होगा। राजस्थान क्षेत्र के क्षेत्रीय संगठन सचिव मोहनलाल साहू ने भी विचार रखे।

राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. बालमुकुंद पाण्डे ने राजस्थान विद्यापीठ के कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत को अखिल भारतीय केन्द्रीय संरक्षक मंडल में मनोनीत करने की घोषणा की और चित्तौड़ प्रांत के संरक्षक के रूप में प्रो. सारंगदेवोत सहित डॉ. देव कोठारी, वैद्य लक्ष्मीनारायण जोशी को मनोनीत किया गया।

निर्वाचन अधिकारी रमेश शुक्ला ने बताया कि प्रांत अध्यक्ष पद पर प्रो. जीवनसिंह खरकवाल का निर्विरोध निर्वाचन हुआ। इसके बाद प्रांत अध्यक्ष प्रो. खरकवाल ने प्रांत की कार्यकारिणी में कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. विवेक भटनागर (उदयपुर), कोषाध्यक्ष गौरीशंकर दवे (उदयपुर), उपाध्यक्ष बाबूलाल भाट (कोटा), संगठन सचिव रामेश शुक्ला (उदयपुर), महासचिव डॉ. मनीष श्रीमाली (उदयपुर), सचिव हरीश बेरी (अजमेर), युगांक (कोटा), लेखक प्रमुख प्रो. आदित्य गुप्ता (कोटा), लेखक सहप्रमुख जीतेन्द्र जोशी (अजमेर), विद्वत प्रमुख डॉ. सूरज राव (अजमेर), विद्वत सहप्रमुख डॉ. रजनीश शर्मा (भीलवाड़ा), प्रचार प्रमुख कौशल मूंदड़ा (उदयपुर), कार्यालय प्रमुख चैन शंकर दशोरा (उदयपुर), महिला प्रमुख डॉ. रेखा महात्मा (उदयपुर), प्रो. दिग्विजय भटनागर (उदयपुर), प्रो. हेमलता वैष्णव (बारां), जनजाति आयाम प्रमुख डॉ. नारायण वडेरा (उदयपुर), जनजाति आयाम सहप्रमुख डॉ. सुरेश मेघवाल (बारां), प्रांत कार्यकारिणी सदस्य पदेन निदेशक प्रताप गौरव केन्द्र अनुराग सक्सेना, नवनीत सोनी (कोटा), प्रो. मनीष श्रीमाली (किशनगढ़़), संजय सोनी (पुष्कर) व अजय यादव (अजमेर) को मनोनीत किया।

हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता

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