इंदिरा गांधी की 1978 वाली भारत बचाओ रैली की तरह अब वोट बचाओ, देश बचाओ रैली में पहुंचें: गहलोत

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इंदिरा गांधी की 1978 वाली भारत बचाओ रैली की तरह अब वोट बचाओ, देश बचाओ रैली में पहुंचें: गहलोत


जयपुर, 30 अक्टूबर (हि.स.)। कांग्रेस एवं इंडिया ग़ठबंधन की ओर से 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली वोट बचाओ, देश बचाओ रैली के महत्व और देश के वर्तमान राजनीतिक हालात पर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता की।

इंदिरा गांधी के समय की ऐतिहासिक रैली को याद करते हुए गहलोत ने कहा कि वर्ष 1978-79 में जब गांधी कांग्रेस की अध्यक्ष थीं, तब भारत बचाओ रैली आयोजित हुई थी। उस रैली के बाद पूरे देश में एक संदेश गया और इंदिरा जी के पक्ष में ऐसी आंधी चली कि जनता पार्टी की सरकार को जाना पड़ा। कांग्रेस भारी बहुमत से संसदीय चुनाव जीती और उन्हें भी पहली बार सांसद बनने का सौभाग्य मिला।

उस आंदोलन को वर्तमान हालात से जोड़ते हुए गहलोत ने कहा कि आज एक बार फिर देश के सामने लोकतंत्र को बचाने की चुनौती है। देश के हालात से आमजन में गहरा आक्रोश और चिंता है। ऐसे में वोट बचाओ, देश बचाओ रैली का विशेष महत्व है। उन्होंने सभी कांग्रेसजनों और आम नागरिकों से अपील की कि अधिक से अधिक संख्या में दिल्ली पहुंचकर रैली में भाग लें। भले ही अपने साधनों से जाना पड़े, लेकिन सभी को इसमें शामिल होना चाहिए। इससे देशभर में एक संदेश जाएगा और लोकतंत्र बचाने की लड़ाई में उनकी भागीदारी सुनिश्चित होगी।

विपक्ष की रैली को अराजकता बताना भाजपा के दोहरे मापदंड

गहलोत ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष की रैलियों को लेकर जानबूझकर यह भ्रम फैलाने का प्रयास किया गया कि कांग्रेस और इंडिया ग ठबंधन अराजकता फैला रहे हैं। जब भाजपा विपक्ष में थी और रैलियां करती थी, तब वह जनता के हितों की बात करती थी। आज विपक्ष रैली कर रहा है तो उसे अराजकता फैलाने वाला बताया जा रहा है। यह दोहरे मापदंड हैं।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने बार-बार स्पष्ट किया है कि लोकतंत्र में सरकार केवल चुनाव के माध्यम से ही बदलती है। जब विपक्ष की लोकतंत्र में गहरी आस्था है, तो वह अराजकता फैलाकर सरकार बदलने की कल्पना भी कैसे कर सकता है? भाजपा ने जनता के बीच जानबूझकर भ्रम पैदा करने का प्रयास किया, लेकिन उसका यह प्रयास सफल नहीं हो पाया।

गहलोत ने कहा कि इंडिया ग ठबंधन की रैली हो रही है तो भाजपा को इससे क्या परेशानी है? कभी व्यापारियों को भड़काने का प्रयास किया जा रहा है, तो कभी भाजपा स्वयं रैली कर रही है और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रैली में जा रहे हैं। विपक्ष की रैली का मुकाबला करने के लिए सत्ताधारी दल के नेताओं का सड़कों पर उतरना देश के लिए एक नई स्थिति है। इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि सत्ता में बैठे लोग विपक्ष की रैलियों को काउंटर करने के लिए इस तरह सक्रिय हो रहे हैं।

शिखर अग्रवाल प्रकरण में मुख्यमंत्री जवाब दें, सीबीआई या ईडी से हो जांच

राजस्थान के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनकी आईपीएस अधिकारी पत्नी को लेकर मीडिया में सामने आई खबरों और आरोपों पर गहलोत ने मुख्यमंत्री से जवाब मांगा। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई अथवा ईडी से जांच कराने की मांग की और कहा कि अधिकारी दंपति तत्काल स्वदेश लौटकर अपनी स्थिति स्पष्ट करें। गहलोत ने कहा कि अधिकारी का नाम ही शिखर है और जैसा नाम है, वैसा ही काम उन्होंने किया है। एक साथ 40 विला लेने की खबर अपने आप में चौंकाने वाली है। मुख्यमंत्री को इस मामले की जिम्मेदारी स्वयं लेनी चाहिए। उनके कार्यकाल को तीन साल होने जा रहे हैं और इन तीन वर्षों में यदि कोई बड़ा घोटाला सामने आया है, तो वह यही मामला है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बैठक कर छूट दी गई थी। मीडिया में जो आरोप सामने आए हैं, उन्हें झुठलाया नहीं जा सकता। आरोपित अधिकारी भी इन तथ्यों को नकार नहीं सकते। कलेक्टर, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल के चेयरमैन और मुख्यमंत्री कार्यालय में अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में लिए गए उनके फैसले गंभीर सवाल खड़े करते हैं। इनसे स्पष्ट होता है कि किस तरह कथित तौर पर भ्रष्टाचार की हदें पार करते हुए निर्णय लिए गए। ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि मुख्यमंत्री कार्यालय में और क्या-क्या हुआ होगा।

केवल एसीबी जांच और एपीओ करने से काम नहीं चलेगा, मुख्यमंत्री स्वयं आगे आएं

गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री को इस मामले में स्वयं आगे आकर जवाब देना चाहिए। केवल एसीबी को जांच सौंपने या अधिकारी को एपीओ करने से काम नहीं चलेगा। जांच सीबीआई अथवा ईडी से कराई जानी चाहिए, जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

उन्होंने कहा कि यदि अधिकारी दंपति का कोई दोष नहीं है और मीडिया में आई खबरों से भ्रम पैदा हुआ है, तो उन्हें तुरंत स्वदेश लौटकर तथ्य स्पष्ट करने चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

Livevns.news Desk
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