भाषा, भूषा और भावना से बनता है भारत - ईश्वरशरण विश्वकर्मा

भाषा, भूषा और भावना से बनता है भारत - ईश्वरशरण विश्वकर्मा
भाषा, भूषा और भावना से बनता है भारत - ईश्वरशरण विश्वकर्मा


उदयपुर, 9 जून (हि.स.)। भाषा संस्कृति की जननी है। सम्पूर्ण भारतवर्ष में पौराणिक काल से ब्राह्मी और संस्कृत का व्याप रहा है। यही वजह है कि भारतवर्ष में सांस्कृतिक और संस्कारिक समानता - समरूपता के दर्शन होते हैं। भाषा, भूषा और भावना से भारत बनता है

यह बात रविवार को यहां प्रताप गौरव केन्द्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ में चल रहे महाराणा प्रताप जयंती समारोह के तहत आयोजित ‘भारतीय परम्परा में जीवंत भारत’ विषयक विशेष व्याख्यान में इतिहासविदों और पुराविदों ने कही। सभी ने साररूप से इस बात को प्रतिपादित किया कि विश्व में भारत श्रेष्ठतम है।

व्याख्यान में भारतीय इतिहास संकलन योजना के कार्यकारी अध्यक्ष ईश्वरशरण विश्वकर्मा ने कहा कि भारत ऐसी अद्भुत भूमि है जहां विभिन्न संस्कृतियों की झलक, भाषाओं की विभिन्नता, खान-पान, रीतियां, नीतियां हैं और यही सब भारतभूमि को महान बनाती है।

उन्होंने बताया कि एक सेमिनार हुआ जिसमें भाषायी विषयक बहस हुई। भाषायी षड्यंत्रों पर चर्चा हुई। अंत में यही निष्कर्ष निकला कि विश्व की सभी भाषाओं के मूल में भारत का योगदान रहा है। भारत से ही भाषाओं का प्रवाह बाहर चला।

उन्होंने कहा कि भाषा विज्ञान, भाषा शास्त्र, भाषा विधा के आधार पर यदि भारत को जानना है तो भाषायी स्वरूप को समझना होगा। मैक्समूलर ने जब इस पर काम किया तो उसने कहा कि दुनिया की प्राचीनतम भाषाओं में संस्कृत समृद्ध भाषा है। जीवन के सारे आयाम इस भाषा में प्रस्फुटित होते हैं। भाषा, भूषा और भावना से भारत बनता है।

उन्होंने कहा कि जो मनस्वी होते हैं उनकी दो वृत्तियां होती हैं। फूल को जहब तोड़ा जाता है तो किसी पावन उद्देश्य के लिए समर्पित होता है। यदि नहीं तोड़ा जाता तो बीज बनता है और पल्लवित होकर फल का रूप प्राप्त कर पुनः किसी के काम आता है। इसी तरह, जीवन की दो वृत्तियां हैं, रण में व वन में। संस्कृति के तीन तत्व हैं, विचार, वाणी व व्यवहार।

व्याख्यान में दक्कन कॉलेज पूना के सहायक प्राचार्य अभिजीत दांडेकर व भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पूर्व निदेशक टीएस रविशंकर ने भी विचार रखे। संयोजक डॉ. विवेक भटनागर ने बताया कि विषय विशेषज्ञों का स्वागत इतिहास संकलन समिति राजस्थान क्षेत्र के क्षेत्रीय संगठन मंत्री छगनलाल बोहरा व वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के जयदीप आमेटा ने अतिथियों का स्वागत किया।

हिन्दुस्थान समाचार/ सुनीता/ईश्वर

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