उत्तर पश्चिम रेलवे के पहले वाटर रिसाइक्लिंग प्लांट का बाड़मेर रेलवे स्टेशन पर उद्घाटन

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उत्तर पश्चिम रेलवे के पहले वाटर रिसाइक्लिंग प्लांट का बाड़मेर रेलवे स्टेशन पर उद्घाटन


बाड़मेर, 04 जून (हि.स.)। उत्तर पश्चिम रेलवे के बाड़मेर रेलवे स्टेशन पर गुरुवार को जोन के पहले वाटर रिसाइक्लिंग प्लांट का उद्घाटन महाप्रबंधक अमिताभ ने किया। इस अवसर पर उन्होंने स्टेशन पर चल रहे पुनर्विकास कार्यों का निरीक्षण कर प्रगति की समीक्षा भी की।

एक दिवसीय बाड़मेर दौरे के दौरान महाप्रबंधक ने वाशिंग लाइन क्षेत्र में स्थापित वाटर रिसाइक्लिंग प्लांट का उद्घाटन करते हुए कहा कि इसकी उपयोगिता और आवश्यकता को देखते हुए उत्तर पश्चिम रेलवे के अन्य मंडलों में भी ऐसे संयंत्र स्थापित करने के प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे।

प्लांट का बटन दबाकर उद्घटान करने के बाद उन्होंने बताया कि लगभग 2.57 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस प्लांट के माध्यम से रेलवे लिनन की धुलाई में उपयोग किए गए पानी को शुद्ध कर पुनः धुलाई कार्य में इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। यह परियोजना विशेष रूप से पश्चिमी राजस्थान जैसे जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में अत्यंत उपयोगी साबित होगी।

महाप्रबंधक ने कहा कि जल संसाधनों के संरक्षण और सतत विकास की दिशा में यह पहल रेलवे के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे बड़ी मात्रा में पानी की बचत संभव हो सकेगी। प्रारंभ में वरिष्ठ मंडल यांत्रिक इंजीनियर अमित स्वामी ने महाप्रबंधक का साफा व वेलकम प्लांट से स्वागत किया।

इससे पहले महाप्रबंधक अमिताभ ने बाड़मेर रेलवे स्टेशन के पुनर्विकसित रेलवे स्टेशन का बारीकी से मुआयना किया तथा स्वच्छता और यात्री सुविधाओं के उन्नयन व संरक्षण पर बल दिया।

इस अवसर पर जोधपुर मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी, मुख्य यांत्रिक इंजीनियर (योजना) मनीष राजवंशी, मुख्य परियोजना प्रबंधक (गति शक्ति) सुनील कुमार, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक हितेश यादव, वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक लोकेश कुमार सिंह व वरिष्ठ मंडल इंजीनियर(पश्चिम) तरुण बीका सहित बड़ी संख्या में रेलवे अधिकारी उपस्थित रहे।

वाटर रिसाइक्लिंग प्लांट एक ऐसी प्रणाली है जो उपयोग किए जा चुके पानी को साफ और उपचारित करके दोबारा उपयोग के योग्य बनाती है। बाड़मेर रेलवे स्टेशन पर स्थापित प्लांट में रेलवे के लिनन (चादर,तकिया कवर,तौलिया आदि) की धुलाई में इस्तेमाल होने वाले पानी को सीधे फेंकने के बजाय एकत्र किया जाता है। इसके बाद विभिन्न चरणों में उसका उपचार किया जाता है, जैसे साबुन, गंदगी और ठोस कणों को अलग करना रासायनिक एवं जैविक उपचार द्वारा पानी को शुद्ध करना। फिल्ट्रेशन और कीटाणुशोधन करना। शुद्ध किए गए पानी को पुनः धुलाई कार्य में उपयोग करना।

इसके प्रमुख लाभाें में पानी की बचत होती है, भूजल और अन्य जल स्रोतों पर दबाव कम होता है, अपशिष्ट जल का प्रदूषण घटता है, पानी की कमी वाले क्षेत्रों, जैसे पश्चिमी राजस्थान, में विशेष रूप से उपयोगी है, रेलवे के पानी के खर्च में कमी आती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव

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