दुर्गाबाड़ी में श्रद्धा और पारंपरिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ मां दुर्गा का विसर्जन

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दुर्गाबाड़ी में श्रद्धा और पारंपरिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ मां दुर्गा का विसर्जन


दुर्गाबाड़ी में श्रद्धा और पारंपरिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ मां दुर्गा का विसर्जन


जयपुर, 21 अक्टूबर (हि.स.)। बनीपार्क स्थित जयपुर दुर्गाबाड़ी एसोसिएशन में विजयादशमी का पर्व श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक बंगाली रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। इस दौरान बंगाली परंपराओं के अनुरूप विधि-विधान से मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन संपन्न हुआ, जहां नम आंखों और भारी मन से भक्तों ने मां को विदाई देते हुए अगले वर्ष पुनः पधारने का निमंत्रण दिया।

जयपुर दुर्गाबाड़ी एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सुदीप्तो सेन ने बताया कि विजयादशमी के पावन अवसर पर सर्वप्रथम मां दुर्गा की पारंपरिक विसर्जन पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान मां को चिवड़ा और दही का विशेष भोग अर्पित किया गया। बंगाली वाद्ययंत्रों यथा 'ढाक' और 'कांसा' की गूंज के बीच आरती संपन्न हुई, जिसके बाद मां दुर्गा की प्रतिमा को विसर्जन के लिए रवाना किया गया।

शोभायात्रा के रूप में प्रतिमा को आकेड़ा डूंगर स्थित सरोवर पर ले जाया गया। यहाँ श्रद्धालुओं ने विशेष पूजा-अर्चना और महाआरती कर मां दुर्गा की आराधना की तथा परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और मंगल की कामना करते हुए पूरे विधि-विधान से प्रतिमा का विसर्जन किया। विसर्जन के पश्चात सरोवर से मंत्रोच्चार के साथ 'शांति जल' लाकर श्रद्धालुओं पर छिड़काव किया गया।

विसर्जन के उपरांत दुर्गाबाड़ी परिसर में 'शुभ विजया' का पारंपरिक आयोजन हुआ। इसमें उपस्थित सभी सदस्यों और श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को गले मिलकर विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं और पारंपरिक बंगाली मिठाई 'रसगुल्ला' खाकर मुंह मीठा किया।

दुर्गा महोत्सव के इस अंतिम दिन परिसर में भक्ति, आत्मीयता और भावनाओं का अनूठा संगम देखने को मिला। मां के विदाई के क्षणों में जहाँ श्रद्धालुओं की आँखें नम थीं, वहीं अगले वर्ष पुनः मां के आगमन के विश्वास और उत्साह ने उनके चेहरों पर मुस्कान भी बिखेर दी। इसी आश्वस्ति के साथ कि “आस्छे बोछोर आबार होबे” जयपुर दुर्गाबाड़ी में दुर्गा पूजा महोत्सव का भावपूर्ण समापन हुआ।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

Livevns.news Desk
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