आईआईटी जोधपुर में जल संरक्षण और सतत जल प्रबंधन पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
-आईसीडब्लयूएस 2026 में देश-विदेश के वैज्ञानिक, नीति-निर्माता और सामुदायिक प्रतिनिधि जल सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन तथा जल संरक्षण की चुनौतियों पर करेंगे मंथन
जोधपुर, 27 अक्टूबर (हि.स.)। जल संकट की बढ़ती चुनौती के बीच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर में 28 से 30 अक्टूबर 2026 तक जल स्थिरता पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन नवाचार, नीति और सामुदायिक लचीलापन का आयोजन किया जाएगा। संस्थान के पर्यावरण एवं सततता अभियांत्रिकी विभाग द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में देश-विदेश के शोधकर्ता, उद्योग विशेषज्ञ, सरकारी प्रतिनिधि और सामुदायिक हितधारक जल संबंधी चुनौतियों के व्यावहारिक एवं नवाचारी समाधान तलाशने के लिए एक मंच पर आएंगे।
जलवायु परिवर्तन, भूजल स्तर में गिरावट, जल की गुणवत्ता में कमी और पानी की बढ़ती मांग ने जल संसाधनों पर दबाव बढ़ा दिया है। सम्मेलन में वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक तकनीक, प्रभावी नीतियों और जनभागीदारी के माध्यम से इन चुनौतियों से निपटने के उपायों पर चर्चा की जाएगी।
राजस्थान की पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियां भी सम्मेलन के प्रमुख विषयों में शामिल होंगी। बावडिय़ां, टांके, जोहड़ और झीलें जल संरक्षण के ऐसे पारंपरिक उदाहरण हैं, जिनसे विशेष रूप से थार मरुस्थल जैसे जल की कमी वाले क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण सीख मिलती है। सम्मेलन में इन पारंपरिक विधियों को आधुनिक विज्ञान, इंजीनियरिंग और आंकड़ों पर आधारित तकनीकों के साथ जोडऩे की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।
सम्मेलन में पांच प्रमुख विषयों पर चर्चा होगी—जल गुणवत्ता एवं उपचार, जलवायु परिवर्तन एवं जल सुरक्षा, जल संसाधन प्रबंधन एवं शासन, प्रकृति-आधारित समाधान एवं पारंपरिक ज्ञान तथा कृषि में जल उपयोग की दक्षता।
सम्मेलन में पद्मश्री प्रो. आशुतोष शर्मा, आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर चेयर एवं भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के पूर्व सचिव; पद्मश्री प्रो. थलप्पिल प्रदीप, आईआईटी मद्रास; प्रो. वोल्कर आबेट्ज, हैम्बर्ग विश्वविद्यालय, जर्मनी; जल संरक्षण के लिए प्रसिद्ध राजेंद्र सिंह (वॉटरमैन ऑफ इंडिया); रामवीर तंवर (पॉन्डमैन ऑफ इंडिया); ओएनजीसी के श्री एस. करुणानिधि तथा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. वी. एस. जाटावत सहित कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञ आमंत्रित हैं।
सम्मेलन के चयनित शोधपत्रों को एसीएस ईएसएण्डटी वाटर और स्प्रिंगर की लेक्चर नोट्स इन सिविल ईंजीनियरिग में प्रकाशन के अवसर मिलेंगे, जो संबंधित प्रकाशकों की समीक्षा एवं स्वीकृति प्रक्रियाओं के अधीन होंगे। शोध, वैज्ञानिक संचार और जल संबंधी नवाचारों में उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने के लिए एसीएस ईएसएण्डटी वाटर और एसीएस ईएसएण्डटी इंडीनियरिंग के सहयोग से 10 पुरस्कार भी प्रदान किए जाएंगे। संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-6, अर्थात् स्वच्छ जल एवं स्वच्छता, के अनुरूप यह सम्मेलन आईआईटी जोधपुर की अंतर्विषयी अनुसंधान और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

