आईआईटी जोधपुर ने विकसित की अगली पीढ़ी की ऊर्जा तकनीकें
सौर ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा नवाचार, फोटो-बैटरियों और उन्नत सोलर मटेरियल्स के जरिए ऊर्जा उत्पादन व भंडारण में ला सकता है क्रांतिकारी बदलाव
जोधपुर, 15 अप्रैल (हि.स.)। ऊर्जा संकट और बढ़ती वैश्विक मांग के बीच आईआईटी जोधपुर के वैज्ञानिकों ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भौतिकी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शाहब अहमद के नेतृत्व में विकसित की जा रही नई ऊर्जा प्रौद्योगिकियां भविष्य में ऊर्जा उत्पादन और भंडारण के तरीकों को पूरी तरह बदल सकती हैं।
वर्ष 2019 में स्थापित एडवांस्ड एनर्जी मटेरियल्स लैब में वैज्ञानिकों की टीम भौतिकी, सामग्री विज्ञान और इंजीनियरिंग के समन्वय से अत्याधुनिक शोध कर रही है। इस शोध का उद्देश्य ऐसी तकनीक विकसित करना है, जो सौर ऊर्जा को अधिक दक्षता से संग्रहित कर सके। शोध का मुख्य फोकस मेटल हैलाइड पेरोव्स्काइट्स जैसी उन्नत सामग्रियों पर है, जिन्हें सौर ऊर्जा क्षेत्र में क्रांतिकारी माना जा रहा है। ये सामग्री न केवल बेहतर प्रकाश अवशोषण क्षमता रखती हैं, बल्कि कम लागत में तैयार की जा सकती हैं। इससे भविष्य के सोलर सेल, एलईडी, फोटोडिटेक्टर और लेजर तकनीकों को नई दिशा मिलने की संभावना है। आईआईटी जोधपुर की टीम क्वासी-डायमेंशनल पेरोव्स्काइट्स विकसित कर रही है, जो अधिक स्थिर और उच्च दक्षता वाली हैं। यह वर्तमान तकनीक की प्रमुख चुनौतियों को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
ऊर्जा की बढ़ती मांग को देखते हुए शोध टीम अगली पीढ़ी की बैटरियों के विकास पर भी काम कर रही है। इसमें लिथियम-आयन बैटरियों में सुधार, लिथियम-सल्फर और जिंक-आयन तकनीकों का विकास तथा पोर्टेबल उपकरणों के लिए फ्लेक्सिबल बैटरियों का निर्माण शामिल है। टीम ने कार्बन नैनोट्यूब आधारित संरचना का उपयोग कर सल्फर कैथोड विकसित किए हैं, जिससे लिथियम-सल्फर बैटरियों की शटल इफेक्ट समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इससे बैटरियों की क्षमता और आयु दोनों में सुधार संभव है।
शोध का सबसे महत्वपूर्ण पहलू फोटो-बैटरियों का विकास है। यह ऐसी एकीकृत प्रणाली है, जिसमें सौर ऊर्जा का संग्रहण और भंडारण एक ही उपकरण में संभव है। इससे लागत, वजन और जटिलता में कमी आएगी। यह तकनीक विशेष रूप से वियरेबल डिवाइस, ऑफ-ग्रिड ढ्ढशञ्ज सिस्टम, ड्रोन और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।
इस संबंध में डॉ. शाहब अहमद ने कहा कि उनका लक्ष्य ऐसी ऊर्जा तकनीक विकसित करना है जो किफायती, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल हो। हम ऐसे समाधान विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं जो दूरस्थ क्षेत्रों को ऊर्जा प्रदान कर सकें, पोर्टेबल उपकरणों को सक्षम बना सकें और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता को कम कर सकें। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा के संग्रहण और भंडारण को एक ही प्लेटफॉर्म में संयोजित करने का विचार तकनीकी रूप से परिवर्तनकारी होने के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत चुनौतीपूर्ण भी है, क्योंकि यह तकनीक अभी प्रारंभिक अवस्था में है और इसके लिए उपयुक्त सामग्रियों के चयन, निर्माण प्रक्रियाओं के विकास और वास्तविक उपयोग के अनुकूल उपकरण डिजाइन पर व्यापक कार्य की आवश्यकता है।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

