होटल एवं रेस्टोरेंट लाइसेंस शुल्क वृद्धि पर होटल उद्योग में चिंता

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होटल एवं रेस्टोरेंट लाइसेंस शुल्क वृद्धि पर होटल उद्योग में चिंता


जोधपुर, 26 मई (हि.स.)। होटल एवं पर्यटन उद्योग से जुड़े व्यवसायियों ने स्वायत्त शासन विभाग द्वारा होटल एवं रेस्टोरेंट के अनुज्ञा (लाइसेंस) शुल्क में प्रस्तावित वृद्धि पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

होटल फेडरेशन ऑफ़ राजस्थान जोधपुर डिवीजऩ की ओर से उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री दिया कुमारी को पत्र प्रेषित किया गया, जिसकी प्रतिलिपि स्वायत्त शासन विभाग के मंत्री एवं निदेशालय स्थानीय निकाय (डीएलबी) के आयुक्त रवि जैन को भी भेजी गई है।

फेडरेशन के अध्यक्ष पवन मेहता एवं सचिव राकेश चौहान ने संयुक्त रूप से कहा कि वर्तमान समय में होटल एवं हॉस्पिटैलिटी उद्योग पहले से ही बढ़ती संचालन लागत, गैस एवं बिजली दरों में वृद्धि, बिजली कटौती के कारण जेनरेटर संचालन पर अतिरिक्त व्यय, परिवहन लागत, कर्मचारियों के बढ़ते वेतन एवं ऑफ-सीजऩ जैसी परिस्थितियों से प्रभावित है। ऐसे समय में लाइसेंस शुल्क में अत्यधिक वृद्धि उद्योग पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाली साबित होगी।

ज्ञापन में बताया गया कि वर्ष 2017 की तुलना में वर्ष 2026 के लिए प्रस्तावित शुल्क में कई श्रेणियों में 40 प्रतिशत से लेकर लगभग 90 प्रतिशत तक की वृद्धि प्रस्तावित की गई है। विशेष रूप से छोटे एवं मध्यम श्रेणी के होटल एवं रेस्टोरेंट व्यवसायियों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पडऩे की आशंका व्यक्त की गई है।

फेडरेशन ने कहा कि राज्य सरकार पर्यटन, निवेश एवं रोजगार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रोत्साहन योजनाएँ संचालित कर रही है। ऐसे में लाइसेंस शुल्क में अत्यधिक वृद्धि उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता एवं संचालन व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।

ज्ञापन के माध्यम से राज्य सरकार से आग्रह किया गया है कि होटल एवं पर्यटन उद्योग की वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित अनुज्ञा शुल्क वृद्धि पर पुनर्विचार कर व्यावहारिक, संतुलित एवं उद्योग हितैषी निर्णय लिया जाए, ताकि पर्यटन एवं आतिथ्य क्षेत्र की विकास गति प्रभावित न हो।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

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