बेसिक कॉलेज की मेजबानी में बीकानेर बनेगा वैश्विक चिंतन का केंद्र, 29 को अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस

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बेसिक कॉलेज की मेजबानी में बीकानेर बनेगा वैश्विक चिंतन का केंद्र, 29 को अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस


बीकानेर, 26 अप्रैल (हि.स.)। महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय एवं बेसिक पी.जी. महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में ‘21वीं सदी में समग्र विकास: विज्ञान, समाज और निरंतरता का एकीकरण’ विषयक एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस 29 अप्रैल को लक्ष्मी हैरिटेज में आयोजित की जाएगी। कॉन्फ्रेंस को लेकर तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। आयोजन स्थल पर व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जिसमें तकनीकी सत्रों के लिए अत्याधुनिक ऑडियो-विजुअल व्यवस्था, प्रतिभागियों के पंजीयन काउंटर, आतिथ्य एवं आवास व्यवस्था, शोध-पत्र प्रस्तुतियों के लिए हॉल की सज्जा तथा ऑनलाइन-ऑफलाइन समन्वय के लिए विशेष आईटी सपोर्ट टीम तैनात की गई है। देश-विदेश से आने वाले प्रतिभागियों के स्वागत हेतु आयोजन समिति द्वारा समन्वय लगातार किया जा रहा है।

कॉन्फ्रेंस संयोजक एवं महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सुरेश पुरोहित ने बताया कि इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश के ख्याति प्राप्त विशेषज्ञ भाग लेंगे। विषय विशेषज्ञों के रूप में डॉ. मंगला नटमपल्ली, प्रो. डॉ. उज्ज्वल कुमार कल्ला, डॉ. मोहित गंभीर, पंकज ओझा तथा प्रो. (डॉ.) देव अरस्तू पंचारिया शामिल होंगे। विशेष आकर्षण के रूप में अंतरराष्ट्रीय मेंटर चिंतन ओझा भी कॉन्फ्रेंस से जुड़ेंगे। आईआईटी मुंबई, यूसी बर्कले और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के एलुमनस ओझा को स्टार्टअप, निवेश और नवाचार क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का वैश्विक अनुभव है। वे गो-टू-मार्केट स्ट्रेटेजी, स्केल-अप और फंड रेजिंग के विशेषज्ञ हैं तथा जी20, BRICS IEEE और Nasdaq जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।

उद्घाटन सत्र में समग्र विकास, विज्ञान एवं समाज के अंतर्संबंध तथा सतत विकास के वैश्विक परिप्रेक्ष्य पर विचार रखे जाएंगे।

डॉ. पुरोहित ने बताया कि उद्घाटन सत्र के पश्चात चार तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें विभिन्न विषयों पर गहन चर्चा होगी। इन सत्रों में देश-विदेश के विशेषज्ञ अपने शोध-पत्र प्रस्तुत करेंगे तथा प्रतिभागियों के साथ संवाद स्थापित करेंगे। लगभग 500 से अधिक प्राचार्य, प्रोफेसर, शोधार्थी एवं विद्यार्थी इन सत्रों में सक्रिय सहभागिता करेंगे, जिससे विचारों का व्यापक आदान-प्रदान संभव होगा। कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, प्रशासनिक अधिकारी एवं गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी, जिससे आयोजन का स्तर और अधिक ऊँचा होगा।

आयोजन सचिव डॉ. रोशनी शर्मा ने बताया कि 21वीं सदी अभूतपूर्व अवसरों और जटिल चुनौतियों का युग है, जहाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव-प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष अनुसंधान और डिजिटल क्रांति ने मानव जीवन को नई दिशा दी है। लेकिन इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन, सामाजिक असमानता, मानसिक स्वास्थ्य संकट और नैतिक दुविधाएँ भी हमारे सामने गंभीर प्रश्न बनकर खड़ी हैं। ऐसे समय में यह अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस केवल एक शैक्षणिक आयोजन नहीं, बल्कि एक वैचारिक मंच है, जहाँ विज्ञान, समाज और सतत विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में ठोस विचार प्रस्तुत किए जाएंगे।

कॉन्फ्रेंस संरक्षक रामजी व्यास ने कहा कि वास्तविक विकास वही है, जो केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित न रहकर मानवता के समग्र उत्थान, सामाजिक न्याय और पर्यावरणीय संतुलन को साथ लेकर आगे बढ़े। यह अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस विभिन्न देशों और क्षेत्रों के विद्वानों, नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और उद्योग विशेषज्ञों को एक साझा मंच प्रदान कर रही है, जहाँ विचारों का आदान-प्रदान ही नहीं, बल्कि ठोस और व्यावहारिक समाधान भी विकसित किए जाएंगे। हमें विश्वास है कि यह आयोजन न केवल अकादमिक जगत को नई दिशा देगा, बल्कि समाज और नीति-निर्माण के स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव छोड़ेगा और सतत विकास की दिशा में सार्थक पहल सिद्ध होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव

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