अपनी भाषा में प्रारंभिक शिक्षा से सृजनात्मक क्षमता का विकास : बीटीयू कुलगुरु

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अपनी भाषा में प्रारंभिक शिक्षा से सृजनात्मक क्षमता का विकास : बीटीयू कुलगुरु


बीकानेर, 23 सितंबर (हि.स.)। बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अखिल रंजन गर्ग ने कहा कि प्रारंभिक अवस्था में अपनी भाषा में पढ़ने-लिखने से सृजनात्मक क्षमता का अधिक विकास होता है और सीखने की प्रक्रिया सहज बनती है। उन्होंने कहा कि चीन और जापान जैसे देशों ने अपनी भाषाओं में ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा दिया है।

राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी), बीकानेर में 10 सितंबर से आयोजित हिन्दी पखवाड़े के समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित करते हुए गर्ग ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रभाव के बीच आने वाले समय में हिन्दी में एआई आधारित तकनीकों का प्रयोग और अधिक प्रभावी होगा। उन्होंने संवाद तथा विभागीय कार्यों में राजभाषा हिन्दी के अधिकाधिक प्रयोग का संकल्प लेने का आह्वान किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए केन्द्र निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने कहा कि ‘रिफॉर्म उत्सव’ के तहत आयोजित हिन्दी पखवाड़ा राजभाषा के प्रगतिशील प्रयोग की दिशा में पहल है। उन्होंने कहा कि भाषा अनुसंधान संस्थानों, किसानों और अन्य हितधारकों के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम है। अनुसंधान एवं कार्यालयीन कार्यों में हिन्दी के अधिकाधिक प्रयोग से अनुसंधान का लाभ समाज तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है।

केन्द्र के राजभाषा नोडल अधिकारी डॉ. राकेश रंजन ने हिन्दी पखवाड़े के दौरान आयोजित प्रतियोगिताओं तथा केन्द्र में राजभाषा के प्रगतिशील प्रयोग से जुड़ी उपलब्धियों की जानकारी दी।

समारोह में हिन्दी निबंध, हिन्दी टंकण और हिन्दी भाषण प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। निबंध प्रतियोगिता में डॉ. श्याम सुंदर चौधरी, टंकण प्रतियोगिता में अखिल ठुकराल और भाषण प्रतियोगिता में डॉ. राजेन्द्र कुमार ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। युवा पेशेवर वर्ग की विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव

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