विश्व स्वास्थ्य दिवस पर एमडीएस विश्वविद्यालय में आयुर्वेद, योग और संतुलित जीवनशैली पर व्याख्यान
अजमेर, 7 अप्रैल(हि.स.)। विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के खाद्य विज्ञान एवं पोषण विभाग, योग विज्ञान एवं मानवीय चेतना विभाग तथा राष्ट्रीय सेवा योजना की तीनों इकाइयों के संयुक्त तत्वावधान में एक प्रेरणादायी एवं ज्ञानवर्धक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक जीवनशैली के बीच संतुलन स्थापित करना रहा।
प्रसिद्ध वैद्य चंद्रकांत चतुर्वेदी ने आयुर्वेद की प्राचीनता एवं वैज्ञानिकता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आयुर्वेद का उद्गम अथर्ववेद से हुआ है। उन्होंने महर्षि चरक द्वारा औषधीय विज्ञान तथा आचार्य नागार्जुन द्वारा भस्म विज्ञान में किए गए योगदान का उल्लेख करते हुए भारतीय चिकित्सा परंपरा की गौरवशाली विरासत को रेखांकित किया।
उन्होंने प्रसिद्ध उक्ति “आरोग्यं परमं भाग्यं, स्वास्थ्यं सर्वार्थ साधनम्” का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वस्थ शरीर ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है, जो सभी लक्ष्यों की प्राप्ति का आधार है। वैद्य चतुर्वेदी ने दिनचर्या, ऋतुचर्या तथा घरेलू औषधियों के वैज्ञानिक उपयोग के माध्यम से निरोग रहने के सरल एवं प्रभावी उपाय बताए। इस अवसर पर उन्होंने स्वयं निर्मित आयुर्वेदिक औषधियां अतिथियों एवं छात्र-छात्राओं को वितरित कर स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति व्यावहारिक संदेश भी दिया।
खाद्य विज्ञान एवं पोषण विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. रितु माथुर ने अपने व्याख्यान में आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न होने वाली समस्याओं, विशेष रूप से मोटापे पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि असंतुलित आहार, अनुचित दिनचर्या एवं अनियमित जीवनशैली के कारण शरीर में अतिरिक्त वसा का संचय होता है, जिसे मोटापा कहा जाता है। यद्यपि यह स्वयं में एक रोग नहीं है, किन्तु यह अनेक गंभीर बीमारियों का कारण बनता है।
प्रो. माथुर ने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक—
“युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु।
युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दुःखहा॥”
का उल्लेख करते हुए कहा कि संतुलित आहार-विहार, नियमित दिनचर्या, संयमित कर्म एवं उचित निद्रा ही स्वस्थ जीवन का मूल आधार हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को संतुलित जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अनेक गणमान्य प्राध्यापक एवं अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें प्रो. अरविंद पारीक, प्रो. सुभाष चंद्र, प्रो. भारती जैन, प्रो. सुब्रतो दत्ता, डॉ. राजू लाल शर्मा, डॉ. असेम जयंती देवी, दीपचंद पवार, बृजेश कुमार पांडे, सुगन चंद मेघवंशी, अनुपमा शर्मा सहित वाणिज्य, फार्मेसी एवं खाद्य एवं पोषण विज्ञान विभागों के अतिथि शिक्षकगण तथा विभिन्न संकायों के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष

