प्रताप गौरव केन्द्र में आज से तीन दिन गूंजेगा ‘हाथी-घोड़ा-पालकी’
उदयपुर, 03 सितंबर (हि.स.)। प्रताप गौरव केन्द्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ में शुक्रवार से भक्ति, उल्लास और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मेला महोत्सव का शुभारंभ होगा। वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति, उदयपुर के अंतर्गत संचालित प्रताप गौरव केन्द्र के तत्वावधान में 4, 5 और 6 सितंबर तक होने वाला यह तीन दिवसीय महोत्सव इस बार धार्मिक अनुष्ठानों के साथ लोक-संस्कृति, संगीत, कला और पारम्परिक उत्सवधर्मिता का भी साक्षी बनेगा। महोत्सव में दही-हांडी प्रतियोगिता का नया प्रारूप विशेष आकर्षण का केन्द्र रहेगा।
प्रताप गौरव केन्द्र के निदेशक अनुराग सक्सेना ने बताया कि महोत्सव की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। जन्माष्टमी के अवसर पर केन्द्र में भगवान श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं, भक्ति और लोक परम्पराओं का मनोहारी समागम देखने को मिलेगा। ‘हाथी-घोड़ा-पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष के साथ पूरा परिसर कृष्णमय होगा।
4 सितंबर को जन्माष्टमी के दिन दर्शन का समय प्रातः 6 बजे से मध्यरात्रि 12 बजे तक रहेगा। दोपहर से मेला प्रारम्भ होगा, जिसमें खान-पान, हस्तशिल्प, धार्मिक एवं सामाजिक साहित्य तथा दैनिक उपयोग की वस्तुओं के विविध स्टॉल लगाए जाएंगे। आकर्षक झूलों और मनोरंजक प्रस्तुतियों के साथ मेला आगंतुकों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र रहेगा।
पंचामृत अभिषेक से होगी शुरुआत
महोत्सव के संयोजक चन्द्र सिंह कोठारी ने बताया कि महोत्सव का शुभारम्भ 4 सितंबर को प्रातः 6 बजे पंचामृत अभिषेक से होगा। इसमें श्रद्धालु 1100 रुपये प्रति जोड़ी की सहयोग राशि देकर सहभागी बन सकेंगे। इसी दिन दोपहर 12 से 2 बजे तक वेशभूषा प्रतियोगिता होगी। पांच वर्ष तक के नन्हे प्रतिभागियों के लिए कान्हा-यशोदा तथा 6 से 12 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए राधा-कृष्ण वेशभूषा प्रतियोगिता होगी। इसमें मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कैलाश डागा मुख्य अतिथि होंगे।
जन्माष्टमी के दिन ही दोपहर 2 से रात 8 बजे तक पारम्परिक दही-हांडी प्रतियोगिता होगी। इसमें विजेता दल के लिए 51 हजार रुपये का प्रथम पुरस्कार रखा गया है। इसमें यूडीए व नगर निगम कमिश्नर अभिषेक खन्ना व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक छगन सिंह राजपुरोहित मुख्य अतिथि होंगे।
दही-हांडी प्रतियोगिता में इस बार अनूठा प्रयोग
महोत्सव का सबसे अभिनव पक्ष दही-हांडी प्रतियोगिता का नया प्रारूप होगा। पारम्परिक प्रतियोगिता के साथ इस बार ऐसी विशेष प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है, जिसमें पारंगत अथवा प्रशिक्षित खिलाड़ी भाग नहीं ले सकेंगे। इस प्रतियोगिता में शामिल होने वाले प्रत्येक दल के लिए अलग दही-हांडी 18 फीट की ऊंचाई पर बांधी जाएगी। प्रत्येक दल को मटकी फोड़ने के लिए निर्धारित समय दिया जाएगा और जो दल सबसे कम समय में मटकी फोड़ने में सफल रहेगा, उसे विजेता घोषित किया जाएगा। नवाचारयुक्त इस प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार 11 हजार रुपये, द्वितीय 5100 रुपये, तृतीय 2100 रुपये तथा सांत्वना पुरस्कार 1100 रुपये रखा गया है। आयोजकों के अनुसार प्रतियोगिता का यह प्रारूप पारम्परिक दही-हांडी में नया रोमांच और सहभागिता का विस्तार करेगा।
झांकी, लहरिया और नाव मनोरथ से सजेगा दूसरा दिन
5 सितंबर को महोत्सव की सांस्कृतिक आभा और अधिक गहरी होगी। प्रातः 9 बजे से झांकी प्रतियोगिता आयोजित होगी, जिसमें कृष्ण की लीलाओं और धार्मिक-सांस्कृतिक प्रसंगों की कलात्मक अभिव्यक्ति देखने को मिलेगी। दोपहर 12 बजे से लहरिया उत्सव आयोजित होगा, जो राजस्थान की रंग-बिरंगी लोक परम्परा को जीवंत करेगा। शाम 4 से 7 बजे तक नाव मनोरथ का आयोजन होगा, जबकि रात 8 बजे से भजन संध्या में भक्ति संगीत की स्वर-लहरियां वातावरण को आध्यात्मिक रंग देंगी।
गवरी के साथ होगा महोत्सव का समापन
6 सितंबर को प्रातः 9 बजे से पारम्परिक गवरी आयोजन होगा। मेवाड़ की लोकनाट्य एवं आदिवासी सांस्कृतिक परम्परा से जुड़ी गवरी की प्रस्तुति महोत्सव के अंतिम दिन को विशिष्ट लोक-रंग प्रदान करेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता

