धानक्या में दीनदयाल मेले का भव्य आगाज, किसान चौपाल से खेल मैदान तक दिखी गांव की ताकत

WhatsApp Channel Join Now
धानक्या में दीनदयाल मेले का भव्य आगाज, किसान चौपाल से खेल मैदान तक दिखी गांव की ताकत


धानक्या में दीनदयाल मेले का भव्य आगाज, किसान चौपाल से खेल मैदान तक दिखी गांव की ताकत


जयपुर, 24 सितंबर (हि.स.)। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय स्मारक धानक्या में बुधवार से तीन दिवसीय दीनदयाल मेले का भव्य शुभारंभ हुआ। मेले का उद्घाटन उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने किया। धानक्या की ऐतिहासिक भूमि पर आयोजित मेले में भारतीय ज्ञान परंपरा, राजस्थान की कला-संस्कृति, हस्तशिल्प, स्वदेशी उत्पाद, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विभिन्न प्रदर्शन लगाए गए हैं। मेले में खेलकूद प्रतियोगिताओं से लेकर किसान चौपाल तक ग्रामीण जीवन के विविध रंग देखने को मिल रहे हैं।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जीवन और चिंतन समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान, स्वावलंबन और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देता है। धानक्या में आयोजित मेला उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के साथ भारतीय संस्कृति, स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समरसता की भावना को मजबूत करने का माध्यम है।

मेले में खेलकूद प्रतियोगिताएं भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

वॉलीबॉल और कबड्डी प्रतियोगिताओं का शुभारंभ समिति अध्यक्ष प्रो. मोहन लाल छीपा, सचिव प्रतापभानु सिंह शेखावत और गांव के वरिष्ठजनों ने किया। धानक्या के साथ आसपास के कई गांवों की टीमों ने प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। कबड्डी में महिला और पुरुष दोनों वर्गों की टीमों ने भाग लिया। समिति अध्यक्ष ने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर उन्हें खेल भावना, अनुशासन और टीम भावना के साथ प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।

दीनदयाल मेले की श्रृंखला में कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर की ओर से गुरुवार को किसान चौपाल आयोजित की गई।

इसमें पूर्व मंत्री लालचंद कटारिया, कुलपति प्रो. पुष्पेंद्र सिंह चौहान, समिति अध्यक्ष प्रो. मोहन लाल छीपा और भागीरथ चौधरी सहित कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ और किसान मौजूद रहे।

पूर्व मंत्री लालचंद कटारिया ने कृषि में नवाचार, आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों के साथ परंपरागत एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। कुलपति प्रो. पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने विश्वविद्यालय की ओर से किसानों के लिए किए जा रहे शैक्षणिक, अनुसंधान और प्रसार कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने कृषि को किसानों के लिए अधिक आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर जोर दिया।

इसी दौरान कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर ने धानक्या गांव को गोद लेने तथा विश्वविद्यालय में पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्वदेशी शोध पीठ स्थापित करने की घोषणा की। समिति अध्यक्ष प्रो. मोहन लाल छीपा ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय की अर्थनीति के केंद्र में किसान था। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय के कृषि संबंधी विचारों का उल्लेख करते हुए जल प्रबंधन और ऐसी कृषि व्यवस्था की आवश्यकता बताई, जो केवल वर्षा पर निर्भर न रहे।

भागीरथ चौधरी ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद महात्मा गांधी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, चौधरी चरण सिंह और दत्तोपंत ठेंगड़ी ने गांव, किसान, देहात और कृषि से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाया।

चौपाल में किसानों और कृषि विशेषज्ञों ने नई कृषि तकनीक, वैज्ञानिक खेती और किसान हित से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया।

तीन दिवसीय दीनदयाल मेले का आयोजन 23 से 25 सितंबर तक राष्ट्रीय स्मारक धानक्या में किया जा रहा है। मेले के अंतिम दिन 25 सितंबर को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती के अवसर पर समारोह और स्मृति व्याख्यान होगा। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले मुख्य वक्ता होंगे।

जेईसीआरसी विश्वविद्यालय के अध्यक्ष ओ.पी. अग्रवाल विशिष्ट अतिथि तथा इनसोलेन एनर्जी लिमिटेड के अध्यक्ष मनीष गुप्ता कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे।

समारोह में वर्ष 2026 में राजस्थान से पद्मश्री सम्मान प्राप्त व्यक्तियों का सम्मान किया जाएगा। इसके अलावा पंडित दीनदयाल उपाध्याय पर पीएचडी करने वाले शोधार्थियों और विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी सम्मानित किया जाएगा।

मेले के माध्यम से धानक्या में विचार, खेती, खेल, संस्कृति और सामाजिक सरोकार एक ही मंच पर दिखाई दे रहे हैं।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

Share this story