दुर्गाबाड़ी में भव्य दुर्गा पूजा महोत्सव का आगाज: स्वर्णिम महल में विराजी मां दुर्गा
जयपुर, 15 अक्टूबर (हि.स.)। गुलाबी शहर जयपुर में शारदीय नवरात्र की रौनक अपने चरम पर है। इसी कड़ी में बनीपार्क स्थित ऐतिहासिक दुर्गाबाड़ी में पारंपरिक बंगाली संस्कृति, अद्वितीय कला और अध्यात्म के संगम के साथ भव्य दुर्गा पूजा महोत्सव की शुरुआत हो चुकी है। महापंचमी के पावन अवसर पर शुरू हुए इन धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के पहले दिन ही शहरवासियों का तांता लग गया, जहां स्वर्ण की तरह दमकते विशाल महल रूपी पंडाल में मां जगदंबा अपने पूरे परिवार के साथ विराजमान हो गई हैं।
स्वर्णिम पंडाल और कोलकाता के मंदिरों की झलक
जयपुर दुर्गाबाड़ी एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सुदीप्तो सेन के अनुसार इस बार दुर्गाबाड़ी का पंडाल कला और वास्तुकला का बेजोड़ नमूना पेश कर रहा है। कोलकाता के प्राचीन मंदिरों की तर्ज पर बने 40 फीट ऊंचे और 150 फीट लंबे इस भव्य पंडाल को पूरी तरह स्वर्णिम आभा से सजाया गया है। पंडाल में मां दुर्गा के साथ माँ लक्ष्मी, माँ सरस्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय की विशाल व मनमोहक प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, जो हर किसी का मन मोह रही हैं। इसके अलावा, पंडाल परिसर में बनी 40 फीट ऊंची भगवान शिव की विशाल प्रतिमा इस आयोजन का मुख्य आकर्षण बनी हुई है। इस वर्ष दुर्गाबाड़ी की सबसे अनूठी विशेषता इसका प्रवेश द्वार और मार्ग है। पंडाल के मुख्य द्वार से लेकर पूजा स्थल तक के ढलान वाले रास्ते पर सृष्टि के कालचक्र को बेहद खूबी से दर्शाया गया है।
प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को सृष्टि के सृजन, वर्तमान और विनाश के तीनों स्वरूपों की जीवंत झलक देखने को मिलती है। इस कालचक्र को निहारते हुए जब श्रद्धालु मां दुर्गा के दरबार तक पहुंचते हैं, तो उन्हें शक्ति, भक्ति और सृष्टि के इस गूढ़ रहस्य का अनूठा अहसास होता है।
संगमरमर और पारंपरिक मिट्टी की प्रतिमाओं का अनूठा संयोग
जयपुर दुर्गाबाड़ी एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सुदीप्तो सेन के अनुसार इस बार भी पूजा स्थल पर दो रूपों में माता के दर्शन हो रहे हैं। यहाँ 16 फीट ऊंची माँ दुर्गा की भव्य संगमरमर की स्थायी प्रतिमा पहले से विराजमान है। इसके साथ ही 10 फीट ऊंची पारंपरिक मिट्टी की सुंदर प्रतिमा भी विधि-विधान से स्थापित की गई है, जिसका पूजन किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, इस मिट्टी की प्रतिमा का विसर्जन आगामी छठ पूजा के दिन किया जाएगा।
आनंद मेला और बंगाली फूड फेस्टिवल की महक
महोत्सव के पहले दिन धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ सांस्कृतिक उल्लास भी देखने को मिला। आनंद मेले और बंगाली फूड फेस्टिवल के आयोजन ने उत्सव के रंग को और गाढ़ा कर दिया। इस मेले में श्रद्धालु अपने घरों से तैयार करके विशेष पारंपरिक बंगाली व्यंजन लेकर पहुंचे और उन्हें मातारानी को अर्पित किया। बंगाली परंपराओं के अनुरूप हुए इन आयोजनों में बंगाली संस्कृति की आत्मीयता, खान-पान और पूजन पद्धतियों के दर्शन हुए, जिसने जयपुर में ही 'मिनी बंगाल' का अहसास करा दिया। महाआरती के साथ शुरू हुए इन आयोजनों ने जयपुर के धार्मिक पटल पर दुर्गा पूजा की भव्यता को एक नए शिखर पर पहुंचा दिया है, जहाँ दूर-दूर से श्रद्धालु पहुँचकर माँ के दर्शन कर रहे हैं और आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

