राज्यपाल बागडे ने किया पंचम वेद—नाट्यशास्त्र पर एकाग्र ग्रंथ का लोकार्पण

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राज्यपाल बागडे ने किया पंचम वेद—नाट्यशास्त्र पर एकाग्र ग्रंथ का लोकार्पण


जयपुर, 22 मई (हि.स.)। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने शुक्रवार को लोकभवन में उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, पटियाला द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'नाट्यशास्त्र : पंचम वेद पर एकाग्र' का लोकार्पण किया। साहित्य अकादेमी के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित कला मर्मज्ञ डॉ. राजेश कुमार व्यास के संपादन में प्रकाशित इस ग्रंथ में देश के मर्मज्ञ विद्वानों ने भारतीय ज्ञान परम्परा के आलोक में नाट्यशास्त्र के विविध आयामों पर लेखन किया है। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख विशेषाधिकारी श्री राजकुमार सागर भी उपस्थित रहे।

बागडे ने भारतीय ज्ञान परम्परा पर की गई इस पहल की सराहना करते हुए संपादक, लेखक डॉ. राजेश कुमार व्यास को बधाई देते हुए उनकी सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा के आलोक में यह महत्वपूर्ण प्रकाशन है। इससे पाठकों को नाट्यशास्त्र ग्रंथ को समझने की नई और मौलिक दृष्टि मिल सकेगी। उन्होंने भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के निदेशक फुरकान खान द्वारा ग्रंथ प्रकाशन के लिए की गई पहल की भी सराहना की।

नाट्यशास्त्र को अप्रैल 2025 में यूनेस्को के प्रतिष्ठित 'मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड' रजिस्टर में शामिल किया था। इसे पंचम वेद कहा गया है। इसमें 37 अध्याय है। नाट्य में रस, संगीत, नृत्य आदि के साथ ही कलाओं से जुड़े महत्वपूर्ण आख्यान और सूत्र इसमें हैं। अभिनव गुप्त ने नाट्यशास्त्र की टीका लिखी थी। इसमें ऋग्वेद से पाठ्य, सामवेद से गीत, यजुर्वेद से अभिनय और अथर्ववेद से रस को ग्रहण कर रचा गया है। यह भारत की कालजयी क्लासिक है। संस्कृत से इसके अनुवाद तो प्रकाशित हुए हैं परन्तु इससे जुड़े विषयों पर बहुत अधिक चिंतन—मनन नहीं हुआ है। डॉ. राजेश कुमार व्यास ने नाट्यशास्त्र के मर्मज्ञ विद्वानों से इसमें आग्रह कर मौलिक दृष्टि से लिखवाया है। स्वयं उन्होंने इसकी भूमिका में लिखा है, 'अभिनव गुप्त की नाट्यशास्त्र टीका भारतीय कलाओं को समझने की महत्व्पूर्ण दृष्टि देती है। नाट्यशास्त्र भारतीय कलाओं का आधार—ग्रंथ है। प्रदर्शन कलाओं, रंगमंच, अभिनय, रस, भाव, वेशभूषा और संगीत पर यह विश्वकोषीय ग्रंथ है। भारतीय कलाओं की आंतरिक दृष्टि को इससे समझा जा सकता है।'

पुस्तक में बैंकॉक एवं कोलंबिया विश्वविद्यालय, न्यूयॉर्क में संस्कृत के अतिथि आचार्य और राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान में कुलपति रहे डा. राधावल्लभ त्रिपाठी, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के पूर्व अध्यक्ष और सुप्रसिद्ध नाटककार, कवि, आलोचक डॉ. अर्जुन देव चारण, नाट्यशास्त्र के विद्वान, नाट्य निदेशक पीयाल भट्टाचार्य, पद्मश्री, कथक गुरु पुरु दाधीच, वरिष्ठ पत्रकार, सिनेमा—मर्मज्ञ ज्ञानेश उपाध्याय, कला मर्मज्ञ नर्मदा प्रसाद उपाध्यायसंगीत नाटक अकादमी के उप सचिव सुमन कुमार, लेखक तेजस्वरूप त्रिवेदी, लोक संस्कृति मर्मज्ञ राजेन्द्र रंजन चतुर्वेदी और श्याम सुंदर दुबे, विख्यात अभिनेता, नाट्य निर्देशक कनु पटेल, कथक गुरु प्रेरणा श्रीमाली, संगीतज्ञ सुनीरा कासलीवाल, कला समीक्षक शशिप्रभा तिवारी, संस्कृति और शास्त्र मीमांसा से जुड़े के.के. पाठक आदि ने नाट्यशास्त्र को अपनी मौलिक दृष्टि से व्याख्यायित किया है। पुस्तक में हजारी प्रसाद द्विवेदी और नामवर सिंह के दो दुर्लभ लेख भी हैं। नए ढंग से देखे जाने और समझे जाने का दृष्टिकोण पाठक पा सकेंगे।

ग्रंथ संपादक डॉ. राजेश कुमार व्यास देश के जाने—माने संस्कृतिकर्मी, कलाविद् और नाट्यशास्त्र के देश के मर्मज्ञ विद्वान हैं। उनकी साहित्य की विभिन्न विधाओं में अब तक 27 मौलिक पुस्तकें प्रकाशित हैं। इस समय वह लोकभवन में राज्यपाल के अतिरिक्त निदेशक (पीआर) पद पर कार्यरत हैं। साहित्य अकादेमी के अलावा उन्हें भारत सरकार का प्रतिष्ठित राहुल सांकृत्यायन अवार्ड, मध्यप्रदेश सरकार का अखिल भारतीय रामचन्द्र शुक्ल आलोचना पुरस्कार, राजस्थानी भाषा अकादेमी का सूर्यमल मिसण शिखर सम्मान आदि बहुत से सम्मानों से सम्मानित किया गया है। दूरदर्शन के लिए उन्होंने 'डेजर्ट कॉलिंग' धारावाहिक का भी लेखन किया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

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