लंपी पर सरकार का एक्शन प्लान, गांव-गांव निगरानी से लेकर पशु आवागमन पर शिकंजा

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लंपी पर सरकार का एक्शन प्लान, गांव-गांव निगरानी से लेकर पशु आवागमन पर शिकंजा


जयपुर, 16 सितंबर (हि.स.)। राजस्थान में गौवंश में फैल रहे लंपी त्वचा रोग की रोकथाम और नियंत्रण को लेकर सरकार ने विभिन्न विभागों को एकजुट कर प्रभावी कार्यवाही की तैयारी शुरू कर दी है। बुधवार को सचिवालय स्थित मंथन कक्ष में आयोजित अंतर-विभागीय समन्वय बैठक में रोग की वर्तमान स्थिति, प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे उपचार, टीकाकरण, निगरानी और संक्रमण की रोकथाम के उपायों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में संबंधित विभागों ने मिलकर रोग पर नियंत्रण सुनिश्चित करने के प्रति प्रतिबद्धता जताई।

पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. सुरेश चंद मीना ने बताया कि विभाग की ओर से फील्ड स्तर पर सतत निगरानी, पशुओं का उपचार, टीकाकरण और पशुपालकों को आवश्यक परामर्श दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में गौवंश की मृत्यु दर बहुत कम है और स्वस्थ होने की दर अच्छी है। अब सभी विभागों के समन्वित प्रयासों से रोग को अन्य जिलों में फैलने से रोकना प्राथमिकता है।

उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के आवागमन को नियंत्रित करने के लिए जांच चौकियां स्थापित करने, स्थानीय पशु हाट और मेलों में पशुओं की उपस्थिति पर प्रतिबंध, मृत पशुओं का सुरक्षित एवं वैज्ञानिक निस्तारण, पशु शेड में पानी और चारे की व्यवस्था, मच्छर-मक्खी जैसे रोगवाहक जीवों के नियंत्रण के लिए धुंध छिड़काव तथा जनजागरूकता अभियान में सहयोग की आवश्यकता बताई।

बैठक में विभिन्न विभागों के दायित्व निर्धारित किए गए। प्रभावित क्षेत्रों में निराश्रित गौवंश के लिए अलग रखने के केंद्रों की स्थापना और संचालन, शेड, पानी, चारा, सफाई, रोगवाहक जीवों के नियंत्रण के लिए धुंध छिड़काव तथा मृत पशुओं के शवों का सुरक्षित निस्तारण पंचायतीराज विभाग और स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी तय की गई।

गृह विभाग को अंतरराज्यीय और अंतरजिला पशु आवागमन पर नियंत्रण, पशुपालन विभाग के साथ मिलकर आवागमन मार्गों पर जांच चौकियां स्थापित करने, पशु परिवहन की निगरानी और आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराने का दायित्व दिया गया है। इसके अलावा पशु हाट और मेलों के आयोजन पर रोक तथा प्रशासन की ओर से जारी प्रतिबंधात्मक आदेशों की प्रभावी पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

गोपालन विभाग और राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (आरसीडीएफ) को गौशालाओं में रखे गौवंश में रोग नियंत्रण के लिए जैव सुरक्षा उपायों की पालना सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है। गौशालाओं और सहकारी समितियों में प्रचार-प्रसार, जनजागरूकता, पशुपालन विभाग तथा गौशाला प्रबंधन के साथ समन्वय और आइसोलेशन केंद्रों की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया।

वन विभाग को वन्यजीव क्षेत्रों की लगभग पांच किलोमीटर की परिधि में टीकाकरण और अन्य रोग नियंत्रण गतिविधियों के लिए समन्वय करने, रोगवाहक जीवों के नियंत्रण हेतु छिड़काव एवं धुंध छिड़काव, जनजागरूकता तथा वन क्षेत्र में मृत पशुओं के सुरक्षित निस्तारण की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

बैठक में गृह विभाग के संयुक्त सचिव सहित वन विभाग, पंचायतीराज विभाग, आरसीडीएफ, गोपालन विभाग और पशुपालन विभाग के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। अधिकारियों ने लंपी रोग की रोकथाम और नियंत्रण के लिए संयुक्त रूप से प्रभावी कार्रवाई जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

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