गहलोत का दावा: 2020 में भाजपा ने सरकार गिराने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन हमने सरकार बचा ली

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गहलोत का दावा: 2020 में भाजपा ने सरकार गिराने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन हमने सरकार बचा ली


जयपुर, 05 जून (हि.स.)। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर वर्ष 2020 के राजनीतिक संकट का जिक्र करते हुए भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी हॉर्स ट्रेडिंग कर सरकारें गिराती है। गहलोत ने दावा किया कि महाराष्ट्र में सरकार गिराने के लिए 50 करोड़ रुपए दिए गए, ऐसा सुनने में आया है। 35-35 करोड़ के सौदे राजस्थान समेत अन्य राज्यों के लिए किए गए। 10-10 करोड़ एडवांस दे दिए, वापस नहीं लिए। देश में हो क्या रहा था। हमने राजस्थान बचा लिया। बीजेपी, धर्मेंद्र प्रधान और अमित शाह ने कमी नहीं रखी थी। हमारे विधायकों की मीटिंगें उनके घर पर होती थी, मानेसर से उनके घर जाते थे। इतने बड़े षड़यंत्र को हमने एक्सपोज किया, इसीलिए हमारी सरकार बच सकी।

जयपुर में गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए गहलोत ने कहा कि वर्ष 2020 में कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने के लिए बड़े स्तर पर राजनीतिक षड्यंत्र रचा गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और उसके शीर्ष नेताओं ने सरकार गिराने के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन कांग्रेस ने एकजुटता दिखाकर सरकार को बचा लिया। गहलोत ने कहा कि सरकार गिराने की कोशिश के दौरान कई विधायकों को 35 करोड़ रुपए तक का ऑफर दिया गया था।

उन्होंने दावा किया कि कुछ लोगों को 10 करोड़ रुपए तक अग्रिम राशि भी दी गई, जिसे बाद में वापस तक नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है, लेकिन देश में इस पर कोई खुलकर चर्चा नहीं करता। पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उस समय भाजपा नेतृत्व ने सरकार गिराने में कोई कमी नहीं छोड़ी थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के बागी विधायकों की बैठकें केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के आवास पर होती थीं और अमित शाह भी वहां आते थे।

गहलोत ने कहा कि कांग्रेस ने पूरे घटनाक्रम को सार्वजनिक कर दिया था और इसी वजह से कथित षड्यंत्र सफल नहीं हो पाया। गहलोत ने दावा किया कि उस समय विधायकों को लाने-ले जाने के लिए दो विमान तक भेजे गए थे, लेकिन एक विमान खाली लौट गया। उन्होंने कहा कि भाजपा को यह आशंका होने लगी थी कि कहीं उसके अपने विधायक ही दूसरी ओर न चले जाएं। इसी कारण पूरा अभियान बीच में रुक गया।

उन्होंने पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां जो घटनाक्रम चल रहा है, उसे भी वे इसी प्रकार की राजनीति से जोड़कर देखते हैं।

गहलोत ने कहा कि राजनीति में आगे बढ़ने के लिए अपनी क्षमता और कार्यशैली से बड़ी पहचान बनानी चाहिए, लेकिन आजकल दूसरे नेताओं को कमजोर दिखाकर खुद को बड़ा साबित करने की प्रवृत्ति बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि नेताओं को गांवों, गरीबों, अनुसूचित जाति बस्तियों और आमजन के बीच जाकर काम करना चाहिए। कांग्रेस की पुरानी जनसंपर्क परंपरा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि समय के साथ वह संस्कृति कमजोर होती गई है।

अपने राजनीतिक जीवन पर टिप्पणी करते हुए गहलोत ने कहा कि उन्हें सार्वजनिक जीवन में बहुत अवसर मिले हैं और वे संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि गांधी परिवार का उन पर हमेशा विश्वास रहा और उन्हें पार्टी तथा सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं। गहलोत ने कहा कि अब उनकी अपेक्षा है कि नई पीढ़ी देश और लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए समर्पित भाव से कार्य करे।

पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पहली बार विधायक बनकर सीधे मुख्यमंत्री बने हैं, इसलिए वे सौभाग्यशाली हैं और उनकी सफलता के लिए शुभकामनाएं हैं।

हालांकि गहलोत ने यह भी कहा कि सरकार के कामकाज को लेकर सवाल उठ रहे हैं और यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार को वास्तविक रूप से कौन दिशा दे रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को केवल शुभकामनाएं ही नहीं, बल्कि विपक्ष और वरिष्ठ नेताओं के सुझाव तथा आलोचनाएं भी स्वीकार करनी चाहिए। गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र में स्वस्थ आलोचना को भी सकारात्मक रूप से लेना चाहिए और सरकार को सुझावों तथा शिकायतों दोनों पर समान रूप से ध्यान देना चाहिए।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

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