तीर्थराज पुष्कर में 43 दिवसीय शत गायत्री पुरुश्चरण महायज्ञ 8 मार्च से 19 अप्रैल तक

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तीर्थराज पुष्कर में 43 दिवसीय शत गायत्री पुरुश्चरण महायज्ञ 8 मार्च से 19 अप्रैल तक


अजमेर, 6 मार्च (हि.स.)। तीर्थराज पुष्कर एक बार फिर विश्व आध्यात्मिक मानचित्र पर प्रमुख केंद्र के रूप में दिखाई देने जा रहा है। आठ मार्च से यहां 43 दिवसीय शत गायत्री पुरुश्चरण महायज्ञ का आयोजन होगा। यह महायज्ञ 19 अप्रैल तक चलेगा। विश्वव्यापी आतंकवाद के शमन, विश्व शांति एवं हिंदू राष्ट्र निर्माण के संकल्प का लेकर किए जा रहे महायज्ञ में 24 करोड़ बार गायत्री मंत्र का उच्चारण होगा, 3 करोड़ आहुतियां दी जाएंगी। महायज्ञ महामंडलेश्वर स्वामी प्रखर महाराज के सान्निध्य में किया जाएगा। आयोजन में अयोध्या, वाराणसी, हरिद्वार, काशी और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों से संत महात्मा, वेदाचार्य और प्रसिद्ध कथावाचक अजमेर पहुंच रहे हैं।

स्वामी प्रखर महाराज ने शुक्रवार को बताया कि आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, पर्यावरण और राष्ट्रीय चेतना के संवर्धन के उद्देश्य से हो रहे इस अनुष्ठान के लिए खरेखड़ी रोड स्थित लगभग 80 बीधा क्षेत्र में विशाल यज्ञ नगरी तैयार की गई है। इसे गायत्री शक्तिपीठ एवं मणिवेदिका पीठ नाम दिया गया है। यहां करीब डेढ़ सौ गुणा डेढ़ सौ का विशाल पांडाल बनाया गया है जिसमें 200 यज्ञ वेदियां स्थापित की गई हैं। इन वेदियों में 200 यजमान और विद्वान आचार्यों के सान्निध्य में 43 दिनों तक नियमित हवन करेंगे। प्रतिदिन लाखों मंत्रों का जप होगा और सम्पूर्ण अनुष्ठान में 24 करोड़ बार गायत्री मंत्र का उच्चारण तथा 3 करोड़ आहुतियां डाली जाएंगी। श्रद्धालु यज्ञशाला एवं पाठशाला की 108 परिक्रमा अथवा हजार गायत्री मंत्रों का जप कर सकेंगे सुबह 6 से 12 बजे तक मंत्र जाप एवं शाम 4 से 7 बजे तक आहुतियां दी जाएंगी। इस महायज्ञ में 2 हजार त्रिकाल संध्या करने वाले विद्वान 24 करोड़ बार गायत्री मंत्रों का जाप करेंगे दो करोड़ 40 लाख दशांश एवं 60 लाख सूर्यसूत्त् आहुतियों सहित करीब 3 करोड़ आहुतियां दी जाएंगी।

आयोजन समिति के अनुसार महायज्ञ में 40 क्विटंल शुद्ध देशी गाय का घी, 25 क्विंटल काले तिल, जौ, गुड़, विशेष जड़ी बूटियां और करीब 3 हजार क्विंटल समिधा तैयार की गई है। सभी सामग्री वैदिक परम्परा के अनुरूप शुद्धता और विधि विधान के साथ संकलित की गई है।

जानकारी के अनुसार मुख्य यज्ञशाला के अलावा पचास गुणा पचास व साठ गुणा साठ फीट के 9 मंत्र जप कक्ष बनाए गए हैं, जहां साधक प्रतिदिन लगभग 60 लाख मंत्र जप का संकल्प पूर्ण करेंगे। आचार्यों, संतों, अतिथियों और सेवकों के लिए पृथक आवास, स्नानागार और शौचालयों की सुव्यवस्थित व्यवस्था की गई है। भोजन व्यवस्था के लिए 6 विशाल भोजनशालाएं तैयार की गई हैं जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी की व्यवस्था रहेगी। लगभग 8 से 10 हजार श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। इसके लिए पुष्कर के विभिन्न धर्मशालाओं और होटलों में अग्रिम बुकिंग की गई हैं।

यज्ञ के आयोजन से पूर्व 8 मार्च को शाम को चार बजे भव्य शोभा यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें हजारों विप्र ब्राह्मण समाज की कन्या एवं महिलाएं ब्रह्म घाट से जल कलश लेकर पुष्कर के मुख्य बाजारों से होते हुए यज्ञ स्थल तक पहुंचेगी। वैदिक मंत्र और मंगल गीतों से संपूर्ण नगर आध्यात्मिक आभा में आलोकित होगा। कलश यात्रा को लेकर तैयारियां पूरी हो गई हैं। कलश यात्रा में शामिल होने वाली कन्या एवं महिलाओं को घर-घर जाकर कूपन तथा महिलाओं को कलश साड़ी और नारियल वितरण किया गया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष

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