होली के बाद शुरू हुआ गणगौर पूजन, सुहागिनों और कुंवारी कन्याओं में उत्साह

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होली के बाद शुरू हुआ गणगौर पूजन, सुहागिनों और कुंवारी कन्याओं में उत्साह


जयपुर, 04 मार्च (हि.स.)। रंगों के पर्व होली के बाद अब राजधानी में सुहाग का प्रतीक माने जाने वाला गणगौर पूजन शुरू हो गया है। राजशाही परंपरा से जुड़े इस पर्व को विवाहिताएं ही नहीं, बल्कि कुंवारी कन्याएं भी हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मना रही हैं।

मान्यता के अनुसार विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना से गणगौर का व्रत रखकर विशेष पूजा-अर्चना करती हैं, जबकि कुंवारी कन्याएं योग्य वर की प्राप्ति की कामना से यह व्रत करती हैं। होलिका दहन के अगले दिन से ही महिलाओं ने गणगौर पूजन का क्रम शुरू कर दिया।बुधवार सुबह नवविवाहिताएं और कन्याएं बगीचों में जाकर फूल और दूब चुनकर लाई। घरों में पवित्र जल कलश में भरकर ईसर-गणगौर की प्रतिमा के समक्ष विधिवत पूजा की गई। इस दौरान महिलाओं ने पारंपरिक गीतों की स्वर लहरियों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। “गौर ये गणगौर माता खोल किवाड़ी, बाहर ऊबी थारी पूजन वाली” और “गोर-गोर गोमती, जोड़ा पूजा पार्वती का” जैसे लोकगीत गूंजते रहे।राजधानी में कई स्थानों पर सामूहिक रूप से भी गणगौर पूजन किया जा रहा है। श्रीमन्न नारायण प्रन्यास की ओर से ढहर के बालाजी स्थित श्री मन्न नारायण धाम में महिलाओं द्वारा सामूहिक गणगौर पूजन किया जा रहा है। यहां प्रतिदिन श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचकर ईसर-गौर का पूजन कर रहे हैं।गणगौर पर्व के साथ ही शहर में पारंपरिक उत्सवों की श्रृंखला का आगाज हो गया है। आने वाले दिनों में गणगौर की शोभायात्रा और विशेष कार्यक्रमों की तैयारियां भी तेज हो गई हैं। राजधानी में आस्था, परंपरा और संस्कृति का यह सुंदर संगम एक बार फिर नजर आने लगा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

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