जनानी ड्योढ़ी से शनिवार को निकलेगी गणगौर माता की शाही सवारी

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जनानी ड्योढ़ी से शनिवार को निकलेगी गणगौर माता की शाही सवारी


जयपुर, 20 मार्च (हि.स.)। राजस्थान की समृद्ध लोक परंपरा,आस्था और सांस्कृतिक वैभव का प्रतीक गणगौर महोत्सव इस वर्ष राजधानी जयपुर में अभूतपूर्व भव्यता और नवाचारों के साथ आयोजित होगा।

पर्यटन विभाग द्वारा तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है और इस बार शाही शोभायात्रा को वैश्विक दर्शकों से जोड़ने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी के निर्देशानुसार महोत्सव में कई नवाचार जोड़े गए हैं।

इस बार राजस्थान फाउंडेशन के माध्यम से विदेशों में बसे भारतीय एवं राजस्थानी समुदाय के लिए जनानी ड्योढ़ी से शनिवार को निकलने वाली गणगौर माता की शाही सवारी का लाइव प्रसारण किया जाएगा साथ ही पर्यटन विभाग के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी इस भव्य आयोजन का सीधा प्रसारण होगा।

पर्यटन विभाग के उपनिदेशक उपेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि गणगौर की शाही सवारी 21 और 22 मार्च को प्रतिदिन शाम 5:45 बजे सिटी पैलेस परिसर से रवाना होकर त्रिपोलिया गेट, छोटी चौपड़, गंगौरी बाजार होते हुए तालकटोरा/पोंड्रिक पार्क तक निकाली जाएगी।

इस बार सजी-धजी पालकियों, ऊंट, घोड़े और हाथियों के लवाजमे की संख्या में वृद्धि कर शोभायात्रा को और अधिक भव्य बनाया गया है। महोत्सव के दौरान जयपुर शहर पूरी तरह लोक संस्कृति के रंग में रंगा नजर आएगा।

प्रदेशभर से चयनित करीब 210 लोक कलाकार अपनी-अपनी विधाओं के माध्यम से इस आयोजन को जीवंत बनाएंगे। कच्छी घोड़ी, गेर, कालबेलिया, चरी, घूमर और चंग जैसे पारंपरिक लोकनृत्य शोभायात्रा की विशेष पहचान होंगे।

बस्सी के बनवारी लाल जाट और जयपुर के तेजपाल भाट कच्छी घोड़ी नृत्य प्रस्तुत करेंगे, जबकि बाड़मेर के हरीश कुमार (लाल दल) और तगाराम (सफेद दल) गेर नृत्य की जीवंत प्रस्तुति देंगे।

कालबेलिया में महावीर नाथ और राजकी सपेरा (छोटी), चरी में अंजना कुमावत तथा घूमर में पूजा नरूका अपनी कला का प्रदर्शन करेंगी।

संगीत विधाओं में शहनाई, मशक, रावणहत्था और भपंग की मधुर ध्वनियां वातावरण को सुरमयी बनाएंगी। बहुरूपिया, मांगणियार गायन, कठपुतलियां और चंग जैसे पारंपरिक लोक रूप शोभायात्रा को और अधिक आकर्षक बनाएंगे।

शोभायात्रा का लवाजमा भी इस बार विशेष आकर्षण रहेगा। पारंपरिक लोक प्रस्तुतियों के साथ शंकर बैंड (नवीन समावेश), निशान हाथी, जेठी पहलवान हाथी, अशोक बैंड, तोप गाड़ी, ऊंट दल, सजे हुए ऊंट, शहनाई ऊंट गाड़ी, ताज बैंड, सुसज्जित रथ, घोड़े और विक्टोरिया कैरिज सहित कुल 32 लवाजमे इस शाही सवारी की गरिमा बढ़ाएंगे।

गौरतलब है की गणगौर महोत्सव केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि राजस्थान की लोक विरासत को सहेजने और नई पीढ़ी से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। यह आयोजन सांस्कृतिक एकता, परंपरा और पर्यटन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गौरतलब है कि गणगौर पर्व महिलाओं की आस्था, सौभाग्य और भगवान शिव-पार्वती के प्रति समर्पण का प्रतीक है, जो राजस्थान की पहचान के रूप में देश-विदेश में विख्यात है।

उल्‍लेखनीय है कि चैत्र शुक्ल तृतीया शनिवार को विभिन्न शुभ योग में सुहाग पर्व गणगौर धूमधाम से मनाया जाएगा। महिलाएं गणगौर माता का पूजन कर और सुख—समृद्धि की कामना करेंगी। शाम को सिटी पैलेस के जनानी ड्योढ़ी से गणगौर की शाही सवारी निकलेगी। शाही ठाठबाट के साथ निकलने वाली गणगौर माता की सवारी के दौरान लोकरंग भी बिखरेंगे। चौगान होते हुए गणगौर माता की सवारी ताल कटोरा के सामने पौंड्रिक उद्यान की छतरी पर पहुंचेंगी वहां मेला भरेगा। माता को यहां घेवर का भोग लगाया जाएगा। इसके बाद यहां करीब 30 मिनिट विश्राम के बाद माता की सवारी पुन: सिटी पैलेस के लिए रवाना हो जाएगी।

माताजी के दर्शन के लिए यहां शहरभर के लोग एकत्रित होंगे और माता के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। वहीं

ईसर—गणगौर की पार्वती और शिव के रूप में पूजा की जाएगी। कुंवारी कन्याएं सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए पूजा करेंगी, वहीं विवाहित महिलाएं पति की दीर्घायु की कामना और अखंड सुहाग की कामना के लिए व्रत रखकर गणगौर पूजन करेंगी। पूजन कर गणगौर को भोग स्वरूप गुणा—सकरपारा अर्पित किए जाएंगे। गणगौर का उद्यापन करने वाली महिलाएं 16 सुहागिनों को भोजन कराकर उपहार स्वरूप भेंट देंगी। वहीं उद्यापन नहीं करने वाली महिलाएं अपनी सास को बयाना देकर आशीर्वाद लेंगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

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