पुष्य नक्षत्र पर गणेश मंदिरों में उमड़ी श्रद्धा: विशेष अभिषेक व पूजा-अर्चना
जयपुर, 28 मार्च (हि.स.)। सनातन धर्म में 27 नक्षत्रों में सर्वश्रेष्ठ माने जाने वाले पुष्य नक्षत्र के अवसर पर शनिवार को शहरभर के गणेश मंदिरों में श्रद्धा और भक्ति का विशेष वातावरण देखने को मिला। नक्षत्रों के राजा कहे जाने वाले इस शुभ योग में भक्तों ने प्रथम पूज्य भगवान गणेश की विधिवत पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और विघ्नों के नाश की कामना की।
ज्योतिषाचार्य बनवरी लाल शर्मा के अनुसार पुष्य नक्षत्र शुद्धता, समृद्धि और सफलता का प्रतीक है तथा इस दिन किए गए धार्मिक कार्य, नई शुरुआत और मंत्र साधना विशेष फलदायी मानी जाती है। यही कारण रहा कि सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही।
मोती डूंगरी गणेश मंदिर में भगवान गणेश का 251 लीटर दूध, 21 किलो दही, 5 किलो घी, 21 किलो बूरा, शहद, केवड़ा जल और गुलाब जल से भव्य पंचामृत अभिषेक किया गया। महंत कैलाश शर्मा ने बताया कि पहले गंगाजल से शुद्धिकरण कर गणपति सहस्त्रनाम के साथ अभिषेक किया गया और 1001 मोदक अर्पित कर विशेष श्रृंगार किया गया।
नहर के गणेश मंदिर में रवि पुष्य योग के दौरान दूर्वा से अभिषेक के साथ गणपति अथर्वशीर्ष एवं अष्टोत्तर शतनामावली के मंत्रोच्चार किए गए। शाम को 251 दीपकों से भव्य आरती का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालुओं को अभिमंत्रित रक्षा सूत्र भी वितरित किए गए।
वहीं, परकोटा स्थित गणेश मंदिर (चांदपोल) में भगवान को 101 किलो दूध और पंचामृत से अभिषेक कर सिंदूरी चोला चढ़ाया गया। मावे के मोदक का भोग लगाकर श्रद्धालुओं को हल्दी की गांठ और सुपारी प्रसाद स्वरूप वितरित की गई।
पुष्य नक्षत्र के शुभ प्रभाव के चलते बाजारों में भी खासा उत्साह देखने को मिला। लोगों ने सोना-चांदी, वाहन और अन्य वस्तुओं की खरीदारी को शुभ मानते हुए जमकर खरीदारी की। वहीं साधकों ने इस दिन मंत्र सिद्धि और विशेष साधनाओं का भी लाभ उठाया।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

