गंगाजल की कलश यात्रा से शुरू हुआ मोती डूंगरी में गणेश जन्मोत्सव

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गंगाजल की कलश यात्रा से शुरू हुआ मोती डूंगरी में गणेश जन्मोत्सव


गंगाजल की कलश यात्रा से शुरू हुआ मोती डूंगरी में गणेश जन्मोत्सव


गंगाजल की कलश यात्रा से शुरू हुआ मोती डूंगरी में गणेश जन्मोत्सव


गंगाजल की कलश यात्रा से शुरू हुआ मोती डूंगरी में गणेश जन्मोत्सव


जयपुर, 07 सितंबर (हि.स.)। छोटी काशी के प्रसिद्ध मोती डूंगरी गणेश मंदिर में सोमवार से प्रथम पूज्य भगवान गणेश के जन्मोत्सव कार्यक्रमों का आगाज हुआ। जन्मोत्सव के पहले दिन महिलाओं की ओर से कलश यात्रा निकाली गई। महिलाएं कलश में गंगाजल लेकर मंदिर पहुंचीं और यह जल प्रथम पूज्य भगवान गणेश को अर्पित किया गया। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर गणपति के जयकारों से गूंज उठा।

मंदिर महंत कैलाश शर्मा ने बताया कि मंदिर के आसपास रहने वाले विभिन्न समाजों के लोगों ने करीब 11 वर्ष पहले भगवान गणेश को अर्पित करने के लिए कलश में गंगाजल लाने की अनुमति ली थी। धीरे-धीरे यह पहल कलश यात्रा का रूप लेती गई। अब हर वर्ष महिलाएं कलश यात्रा के रूप में गंगाजल लेकर मंदिर पहुंचती हैं और इसे भगवान गणेश को अर्पित करती हैं।

कलश यात्रा से लाए गए गंगाजल से भगवान गणेश का स्नान कराया गया। इसके बाद विधि-विधान से अभिषेक किया गया। भगवान को चोला चढ़ाकर नवीन पोशाक धारण कराई गई और विशेष शृंगार किया गया। पूजा-अर्चना के बाद प्रथम पूज्य को मोदकों का भोग लगाया गया।

मंगलवार को पुष्य नक्षत्र में भगवान गणपति का विशेष पंचामृत अभिषेक होगा। इसके लिए 251 किलो दूध, 50 किलो दही, 25 किलो बूरा, 11 किलो शहद और 11 किलो घी का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा गुलाब जल, केवड़ा जल और इत्र से भी भगवान का अभिषेक होगा।

पंचामृत अभिषेक के बाद भगवान को चोला चढ़ाया जाएगा और नवीन पोशाक धारण कराई जाएगी। प्रथम पूज्य को नया मुकुट पहनाया जाएगा तथा 1008 मोदकों का भोग लगाया जाएगा। पूजन के बाद नई ध्वजा चढ़ाई जाएगी। मंदिर परिवार की ओर से मुख्य ध्वजा और श्रद्धालुओं की ओर से 11 अन्य ध्वजाएं चढ़ाने की परंपरा है। मुख्य ध्वजा 27 दिन में बदली जाती है, जबकि अन्य ध्वजाएं समय-समय पर बदली जाती हैं।

गणेश जन्मोत्सव कार्यक्रमों के तहत 9 सितंबर को मंदिर में मोदकों की भव्य झांकी सजाई जाएगी। इसमें 251-251 किलो के दो विशाल मोदक, 51-51 किलो के पांच और 21-21 किलो के 21 मोदक शामिल होंगे। इसके अलावा 1.25 किलो के 1100 मोदक और हजारों छोटे मोदक भी सजाए जाएंगे।

मोदक झांकी तैयार करने में करीब 3 हजार किलो घी, 3 हजार किलो बेसन, 9 हजार किलो शक्कर और 1000 किलो सूखे मेवों का इस्तेमाल होगा। श्रद्धालु सुबह 5 बजे से मोदक झांकी के दर्शन कर सकेंगे। इस दिन मंदिर में बाहर से लाया गया प्रसाद नहीं चढ़ाया जाएगा। भगवान को 21, 108 और 1008 मोदक अर्पित किए जाएंगे।

शाम 6 बजे सुगम संगीत और कथक की प्रस्तुति होगी, जबकि शाम 7 बजे श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क प्रसाद वितरण किया जाएगा।

मंदिर में 10 सितंबर को फलों, 11 सितंबर को सब्जियों और 12 सितंबर को फूलों की विशेष झांकी सजाई जाएगी। इन झांकियों में प्रकृति और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। तीनों दिन शाम 6 बजे कथक की प्रस्तुति होगी। वहीं 8 से 12 सितंबर तक ध्रुपद, सुगम संगीत और कथक कलाकार भगवान गणेश को अपनी कला समर्पित करेंगे।

13 सितंबर को गणेशजी का मेहंदी पूजन और सिंजारा होगा। इस अवसर पर सोजत की करीब 3500 किलो मेहंदी भगवान गणेश को धारण कराई जाएगी। पूजा के बाद रात 7:30 बजे पांच स्थानों से मेहंदी प्रसाद का वितरण किया जाएगा। महिलाओं और कन्याओं के लिए मेहंदी की अलग व्यवस्था रहेगी। इसी दिन भगवान गणेश को साल में केवल गणेश चतुर्थी पर धारण कराया जाने वाला स्वर्ण मुकुट पहनाया जाएगा। चांदी के सिंहासन पर विराजित गणेशजी विशेष पोशाक और नौलखा हार में नजर आएंगे।

14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के अवसर पर भगवान गजानन का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस दिन सुबह 5 बजे मंगला आरती से रात 11:40 बजे शयन आरती तक श्रद्धालुओं को दर्शन होंगे। विशेष पूजन सुबह 11:20 बजे, शृंगार आरती 11:30 बजे, भोग आरती दोपहर 2:15 बजे और संध्या आरती शाम 7 बजे होगी।

भोग के दौरान दोपहर 1:30 से 2 बजे तक मंदिर के पट मंगल रहेंगे। इस दिन चांदी के सिंहासन पर विराजित मोतीडूंगरी गणेशजी को स्वर्ण मुकुट पहनाया जाएगा।

वहीं नौ दिवसीय गणेश जन्मोत्सव का समापन 15 सितंबर को भगवान गणेश के नगर भ्रमण के साथ होगा। गणेशजी महाराज शाम को मोतीडूंगरी मंदिर से नगर भ्रमण के लिए रवाना होंगे। यात्रा एमडी रोड, जौहरी बाजार, त्रिपोलिया बाजार, गणगौरी बाजार और नाहरगढ़ रोड होते हुए गढ़ गणेश मंदिर पहुंचेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

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