सरकारी कर्मचारियों को निशुल्क साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण देने का प्रस्ताव, मुख्य सचिव को भेजा पत्र
जोधपुर, 25 जून (हि.स.)। प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों पर रोक लगाने के उद्देश्य से कार्यरत एएसडी एज्यूकेशन सोसाइटी ने अपने सफलतापूर्वक 5 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर आयोजित प्रेस वार्ता में संस्था की संस्थापक अध्यक्ष डॉ. अमृता एस. दूदिया ने संस्था की उपलब्धियों और भविष्य की कार्ययोजना की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में संस्था ने 50 हजार से अधिक लोगों को साइबर जागरूकता अभियान से जोडक़र डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक किया है।
सहकारिता विभाग, राजस्थान सरकार के अंतर्गत पंजीकृत एएसडी एज्यूकेशन सोसाइटी ने बिना किसी व्यावसायिक लाभ के समाज सेवा के भाव से कार्य करते हुए डिजिटल सुरक्षा को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया है। संस्था का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को डिजिटल रूप से इतना सक्षम बनाना है कि वह किसी भी प्रकार की साइबर ठगी का शिकार न बने।
प्रेस वार्ता में संस्था की सचिव सुरभि दूदिया के साथ टीम सदस्य सानिया जांगिड़, वंशिका कुमावत, विभूति टाक और सुदीक्षा सिंघवी भी उपस्थित रहीं।
डॉ. अमृता एस. दूदिया ने बताया कि वे पिछले दो दशकों से सामाजिक उद्यमिता, शिक्षा और व्यक्तित्व विकास के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इस दौरान उन्होंने राजस्थान न्यायिक सेवा, राजस्थान प्रशासनिक सेवा, राजस्थान पुलिस सेवा, राजस्थान पुलिस तथा राज्य न्यायिक अकादमी सहित विभिन्न संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों को व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता और जीवन प्रबंधन का प्रशिक्षण प्रदान किया है। वर्तमान में वे एएसडी एज्यूकेशन सोसाइटी तथा नेतृत्व एवं कौशल विकास संस्थान के माध्यम से शिक्षा, युवा सशक्तिकरण और साइबर सुरक्षा जागरूकता के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं।
उन्होंने बताया कि संस्था के सामाजिक अभियान काइंडनेस बूमरैंग के माध्यम से हजारों लोगों तक सहयोग, मार्गदर्शन और उपयोगी जानकारी पहुंचाई गई है। इस अभियान के तहत लोग बिना किसी शुल्क के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कर एक-दूसरे की सहायता कर रहे हैं। ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से संचालित यह अभियान सामाजिक समरसता और सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है।
डॉ. दूदिया ने बताया कि संस्था ने जोधपुर के सामाजिक संगठन सत्यमेव जयते सिटिजन सोसायटी के साथ मिलकर साइबर जागरूकता अभियान की शुरुआत की थी। उस समय तत्कालीन पुलिस आयुक्त राजेंद्र सिंह की उपस्थिति में अभियान का शुभारंभ हुआ था। इसके बाद पुलिस आयुक्तालय और साइबर टीम के सहयोग से अनेक कार्यक्रम आयोजित कर हजारों लोगों को लाभान्वित किया गया।
डिजिटल सुरक्षा का संदेश व्यापक स्तर तक पहुंचाया :
वर्ष 2025-26 के दौरान संस्था ने नई दिल्ली स्थित सूचना साझा एवं विश्लेषण केंद्र द्वारा संचालित राष्ट्रव्यापी साइबर जागरूकता अभियान को सहयोग प्रदान करते हुए डिजिटल सुरक्षा का संदेश व्यापक स्तर तक पहुंचाया। इसके अलावा साइबर पुलिस आयुक्तालय, जोधपुर के साथ मिलकर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम, कार्यशालाएं और संवाद सत्र आयोजित किए गए।
संस्था ने भारतीय सेना के जवानों, पुलिसकर्मियों, कमांडो प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे जवानों, लघु उद्योग भारती, वन प्रशिक्षण अधिकारियों, विद्यालय एवं महाविद्यालय के विद्यार्थियों, व्यापारियों तथा महिला समूहों को सुरक्षित डिजिटल लेन-देन और साइबर सुरक्षा से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान किया है।
संस्थापक अध्यक्ष ने बताया कि तकनीकी जानकारी के अभाव तथा फर्जी लिंक, नकली लॉटरी और अवैध ऋण आवेदन जैसे प्रलोभनों के कारण अनेक सरकारी कर्मचारी भी साइबर अपराधियों के जाल में फंस रहे हैं। इसे देखते हुए संस्था ने राजस्थान के सभी जिलों में कार्यरत सरकारी कर्मचारियों के लिए विशेष साइबर जागरूकता अभियान की रूपरेखा तैयार की है।
इस संबंध में राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव को एक आधिकारिक पत्र भेजकर सहयोग और अनुमति का अनुरोध किया गया है। संस्था ने स्पष्ट किया है कि उसने सरकार से किसी प्रकार की वित्तीय सहायता नहीं मांगी है। केवल जिला कलेक्टरों और विभागाध्यक्षों को आवश्यक निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है, ताकि कर्मचारियों के लिए निशुल्क प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जा सकें। डॉ. दूदिया ने कहा कि प्रशासनिक सहयोग मिलने पर सरकारी कर्मचारी डिजिटल कार्यप्रणाली को अधिक सुरक्षित तरीके से अपनाने में सक्षम होंगे और पूरे राज्य में साइबर सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

