लोक जीवन पर हुआ मंथन: सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजा मंच
जयपुर, 21 फ़रवरी (हि.स.)। ललित कला का लालित्य,लोक कलाओं की मनोरम प्रस्तुतियां,आम जीवन को सुखद और सरल बनाने वाले लोक व्यवहार पर गहन चिंतन, जवाहर कला केन्द्र में शनिवार को कुछ ऐसा ही दृश्य नजर आया। मौका रहा संस्कार भारती, जयपुर प्रान्त, जवाहर कला केन्द्र एवं पर्यटन,कला संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित 'लोक कला संगम' महोत्सव के दूसरे दिन का।
दिन की शुरुआत कृष्णायन सभागार में 'राजस्थानी लोक मन, मिट्टी और परम्परा का देशज संसार' विषय पर संवाद के साथ हुई। प्रान्त अध्यक्ष प्रो मधु भट्ट तैलंग ने सभी का आभार एवं महामंत्री बनवारी लाल चेजारा ने समारोह की प्रस्तावना रखी। सत्र में पद्मश्री तिलक गीताई, अरुण प्रकाश व्यास, अंशु हर्ष ने विचार रखे। तिलक गिताई ने कहा कि राजस्थान की लोक परंपरा बहुत समृद्ध रही है, स्थानीय भाषा में रागमाला जैसे विषय पर काम किया गया जिसे विदेशियों ने भी अपनी रिसर्च में शामिल किया। अरुण व्यास ने कहा कि लोक को लेकर समझ विकसित करने की जरूरत है इसके लिए सोशल मीडिया जैसे नवीन तकनीकों का उपयोग किया जाना चाहिए। अंशु हर्ष ने राजस्थानी साहित्य पर प्रकाश डाला। डॉ. चेतन औदिच्य ने सत्र का संचालन किया।
द्वितीय सत्र में अरुण शर्मा, डॉ. अमिता राज गोयल और अशोक शर्मा ने 'पर्यटन, पर्यावरण और लोक कला धरोहर से नवाचार तक' विषय पर विचार रखे। अशोक शर्मा ने कहा कि हमारे शास्त्रों में पर्यावरण संरक्षण का संदेश सदियों पहले दिया गया है वहीं कई पौधों को धार्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है इसके पीछे एक विज्ञान है। हमें इन्हें संरक्षित रखने के लिए नई पीढ़ी को लोक में प्रचलित हर विषय और वस्तु का वैज्ञानिक महत्व बताना पड़ेगा। उन्होंने सिर्फ संकल्प नहीं व्यहार में पर्यावरण संरक्षण सीख को अपनाने का संदेश दिया। अरुण शर्मा ने कहा कि स्वविवेक से ही हमें लोक में प्रचलित नियमों का पालन करना चाहिए इससे कल्याण होगा। उन्होंने परिवार के बदलते स्वरूप पर चिंता जाहिर की। डॉ. अमिता राज गोयल ने कहा कि नवाचार वह नहीं जो लोक को बदले बल्कि उसे नवाचार कहा जाएगा जो लोक को आज के समय में लाकर खड़ा कर दे।
शाम को शिल्पग्राम का मंच पर लोक कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियों से सजा। कैलाश गोड़ ने जयपुर की गालीबाजी की प्रस्तुति दी। टोंक के मोहम्मद आसिफ खान व कलाकारों ने चार बेंत प्रस्तुत किया। राजेश भाट ने कठपुतली और गोपीमाली एंड बिंदोरी ग्रुप ने अलगोजा वादन से समां बांधा। राजेन्द्र राव व समूह के कलाकारों ने चरी व चिरमी नृत्य की प्रस्तुति से सभी का मन मोहा। सत्यनाराण शर्मा व पार्टी के कलाकारों ने कुचामणी ख्याल प्रस्तुत किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

