लोक संस्कृति को जीवंत रखने के लिए संभाग और जिला स्तर पर होंगे:उप-मुख्यमंत्री दीया कुमारी

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लोक संस्कृति को जीवंत रखने के लिए संभाग और जिला स्तर पर होंगे:उप-मुख्यमंत्री दीया कुमारी


जयपुर, 22 फ़रवरी (हि.स.)। राजस्थान की उप-मुख्यमंत्री दीया कुमारी ने कहा कि राज्य की समृद्ध लोक संस्कृति को जीवंत बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने घोषणा की कि भविष्य में 'लोक कला संगम' जैसे आयोजनों को संभाग और जिला स्तर पर विस्तारित किया जाएगा ताकि नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे।

दीया कुमारी रविवार को जवाहर कला केंद्र के शिल्प ग्राम में आयोजित तीन दिवसीय महोत्सव राजस्थान लोकरंग रो उजास के समापन समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रही थीं। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलन कर सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ किया। समापन समारोह में राजस्थान के विभिन्न अंचलों से आए कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। फतेहपुर शेखावाटी के राज कुमार शर्मा एवं दल ने चंग की थाप और धमाल से फाल्गुनी बयार का सजीव चित्रण किया।

लालसोट के अंबालाल एवं गणेश मंडल ने 'हेला ख्याल दंगल' और झुंझुनूं के गजपत भोपा ने 'पाबूजी की फड़' का वाचन कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। डॉ रीमा गोयल के निर्देशन में कलाकारों ने तेरह ताली नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी, वहीं आचुकी सागर एंड पार्टी द्वारा प्रस्तुत 'भवाई नृत्य' आकर्षण का केंद्र रहा। इसके अतिरिक्त विराटनगर की पारंपरिक रागिनी ने भी दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।

'संस्कार भारती' और राजस्थान पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस मेले में पर्यटकों और युवाओं का भारी उत्साह देखा गया। उत्सव के दौरान कच्छी घोड़ी, कठपुतली शो, शहनाई वादन और बहरूपिया कला ने राजस्थान की विविधता को दर्शाया। 'चितरा रो आंगण' में मांडना कला का सजीव चित्रण किया गया।

विभिन्न स्टॉलों पर हस्तशिल्प और पारंपरिक ग्रामीण उत्पादों की जमकर खरीदारी हुई। दीया कुमारी ने विश्वास जताया कि सरकार और आम जनमानस के सम्मिलित प्रयासों से राजस्थान की लोक विरासत को नई ऊंचाइयों तक ले जाया जाएगा। यह तीन दिवसीय संगम लोक कलाओं के संरक्षण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

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