नींदड बैनाड़ की तर्ज पर प्रदर्शन की तैयारी में इंदिरा गांधी नगर विस्तार योजना में प्रभावित किसान

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नींदड बैनाड़ की तर्ज पर प्रदर्शन की तैयारी में इंदिरा गांधी नगर विस्तार योजना में प्रभावित किसान


जयपुर, 21 अक्टूबर (हि.स.)। पंद्रह साल बाद भी इंदिरा गांधी नगर विस्तार योजना को लेकर अधिग्रहित जमीन के पट्टे किसानों को नहीं मिल पा रहे है। इसके चलते किसान न तो खेती कर पा रहे है और ना ही अपने बच्चों की शादी कर पा रहे है। लगातार प्रताडि़त हो रहे किसान अब नींदड़ बैनाड़ किसान आंदोलन की तर्ज पर जमीन को अवाप्ति मुक्त करवाने को लेकर प्रदर्शन करने की योजना तैयार कर रहे है। इसकों लेकर प्रभावित किसान 25 अक्टूबर को एक बड़ी मीटिंग आयोजित करने जा रहे है। इसमें दांतली और सिरोली गांव के प्रभावित लोग हिस्सा लेंगे। इस बैठक में आंदोलन की रुपरेखा बनाने के साथ विभिन्न विषयों पर चर्चा की जाएगी।

गौरतलब है कि नींदड़ आवासीय योजना में प्रभावित किसानों ने भूमि समाधि से लेकर कई अलग-अलग प्रकार से धरना प्रदर्शन जारी है। यह आंदोलन जेडीए द्वारा नींदड़ आवासीय योजना के तहत की जा रही 1,350 बीघा कृषि भूमि की अवाप्ति को रद्द कराने के लिए लंबे समय से चलाया जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार हाउसिंग बोर्ड खातीपुरा स्टेशन के नजदीक दांतली और एक अन्य गांव से लगती जमीन पर इंदिरा गांधी नगर विस्तार के नाम से योजना लेकर आया था। इस योजना के लिए साल 2010 में जमीन अधिग्रहित की थी। इस योजना के लिए 314 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई थी। जमीन अधिग्रहण करने के 10 साल बाद भी हाउसिंग बोर्ड अधिग्रहित जमीन के बदले किसानों को भूखंडों के पट्टे जारी नहीं कर पाया। हाउसिंग बोर्ड द्वारा किसानों को अधिग्रहित जमीन के बदले 20 प्रतिशत आवासीय और 5 प्रतिशत वाणिज्यक भूमि के पट्टे जारी करने थे। जब तक जमीन थी किसान इसमें खेती कर अपने परिवार का जीवन यापन कर रहे थे, लेकिन अब उनके सामने मुश्किल खड़ी हो गई है। हाउसिंग बोर्ड से किसानों को आश्वासन के अलावा कुछ भी नहीं मिल पा रहा है। 3 साल से अधिक समय नहीं हुई एलएनसी की बैठक प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले 3 साल से अधिक समय से एलएनसी की बैठक नहीं हुई है। इस बैठक में किसानों को पट्टे जारी करने को लेकर फैसला किया जाना था। इस कमेटी में यूडीएच सेक्रेटरी, हाउसिंग बोर्ड आयुक्त, डायरेक्टर, डिप्टी डायरेक्टर, इंजिनियर सहित अन्य अधिकारी शामिल होते है। इसके अलावा पिछले दिनों सरकार ने वाणिज्यक पट्टों को लेकर एक आदेश जारी किया था। इस में आदेश में किसानों को वाणिज्यक पट्टे लॉटरी सिस्टम से जारी करने की बात कहीं गई थी। इस आदेश का किसान विरोध कर रहे है। उनका कहना है कि आवासीय के साथ वाणिज्यक पट्टे बिना लॉटरी के पूर्व की भांति दिए जाएं। 10 प्रतिशत को राहत, 90 प्रतिशत किसान अब भी परेशान स्थानीय ग्रामीणों और प्रभावित किसानों ने बताया कि आवासन मंडल द्वारा केवल 10 प्रतिशत प्रभावितों को ही पट्टे और मुआवज़ा जारी किया, जबकि 90 प्रतिशत किसान आज भी प्रक्रिया पूरी होने की राह देख रहे हैं।

किसानों का कहना है कि हमारी उपजाऊ जमीन अधिग्रहीत कर ली गई। न तो हमें 2011 में तय हुआ पूरा 25 प्रतिशत का मुआवजा मिला और न ही विकसित भूखंड (पट्टे) दिए गए। उल्टे हमारी जमीन का एक हिस्सा रेलवे को दे दिया गया, लेकिन मूल काश्तकारों को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया है। अक्टूबर 2010 में आवासन मंडल की बैठकों में किसानों को जल्द मुआवजा देने का निष्पादन (समझौता) हुआ था लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि लगभग दो दशक बीतने के बाद भी अधिकांश किसान आज भी अपने हक के लिए भटक रहे हैं। मिले 40 फीसदी मुआवजा दांतली से लगते ग्राम सिरोली में भी आवासन मंडल योजना लेकर आ रहा है। इसके लिए आवासन मंडल ने सिरोली गांव की 329.17 हैक्टेयर भूमि की अवाप्ति वर्ष 2010-11 से की जा रही है। अवाप्ति के बाद हमें 2010 की पुरानी डीएलसी दर पर नगद मुआवजा दिया जा रहा है, जो आज के बाजार मूल्य से 15 गुना कम है। प्रभावित किसानों का कहना है कि जेडीए की लैंड पूलिंग योजना में किसानों को 45 प्रतिशत तक विकसित भूखंड दिया जा रहा है। गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा में 40 से 50 प्रतिशत तक विकसित भूमि देने का प्रावधान है। सिरोली योजना 14 साल से लंबित है, 80 से अधिक आपत्तियां पहले ही दर्ज हैं, लेकिन आज तक किसानों के हित में निर्णय नहीं हुआ।

राजस्थान आवासन मंडल आयुक्त अरविंद पोसवाल का कहना है कि किसानों को पट्टे नहीं मिलने के कई कारण है। इसमें कोर्ट केस,कुछ किसानों से सहमति नहीं मिलना, रेलवे से मुआवजे का विवाद, एलएनजी की बैठक नहीं होना सहित कई अन्य कारण है। सभी समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया जा रहा है। इसमें करीब 6-7 महिने लग जाएंगे। कई किसानों को पट्टे मिल भी चुके है। योजना के लिए किसानों की 1257 बीघा जमीन अधिग्रहित की गई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश

Livevns.news Desk
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