सरकारी स्कूलों के 75 हजार बच्चों की होगी नेत्र जांच, जरूरतमंदों को मिलेंगे चश्मे

WhatsApp Channel Join Now
सरकारी स्कूलों के 75 हजार बच्चों की होगी नेत्र जांच, जरूरतमंदों को मिलेंगे चश्मे


जयपुर, 13 अगस्त (हि.स.)। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की आंखों की रोशनी अब सरकारी स्तर पर जांची जाएगी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर प्रदेशभर में विशेष नेत्र जांच अभियान शुरू किया जा रहा है। अभियान के तहत करीब 75 हजार जरूरतमंद विद्यार्थियों को उनकी दृष्टि संबंधी आवश्यकता के अनुसार निःशुल्क चश्मे उपलब्ध कराए जाएंगे। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खीवसर ने बताया कि बच्चों की आंखों की समय पर जांच कर दृष्टि संबंधी समस्याओं की शुरुआती स्तर पर पहचान और उपचार बेहद जरूरी है। सरकार का प्रयास है कि किसी भी विद्यार्थी की पढ़ाई कमजोर दृष्टि के कारण प्रभावित नहीं हो। इसी उद्देश्य से सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की नेत्र जांच को अभियान के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।

प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि पिछले वर्ष भी मुख्यमंत्री के निर्देश पर सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों की आंखों की जांच कराई गई थी। उस अभियान में 71 हजार से अधिक बच्चों को निःशुल्क चश्मे वितरित किए गए थे। इस बार भी चिकित्सा एवं शिक्षा विभाग के समन्वय से अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है।

ब्लॉक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों तथा ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित किया गया है। सरकारी स्कूलों में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम यानी आरबीएसके की टीमें विद्यार्थियों की प्रारंभिक नेत्र जांच करेंगी।

विद्यालय स्तर पर शिक्षकों द्वारा शाला दर्पण पर उपलब्ध विद्यार्थियों के आंकड़ों के आधार पर जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इस व्यवस्था से स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की पहचान और उनकी जांच को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

प्रारंभिक जांच के दौरान जिन विद्यार्थियों में दृष्टि संबंधी समस्या सामने आएगी, उनकी आगे की नेत्र जांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर ऑप्थेल्मिक असिस्टेंट के माध्यम से कराई जाएगी। प्रदेश में 382 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ऑप्थेल्मिक असिस्टेंट कार्यरत हैं।

इससे स्कूल में प्रारंभिक जांच के बाद संदिग्ध मामलों की विशेषज्ञता वाले स्तर पर दोबारा जांच की जा सकेगी। जांच में चश्मे की आवश्यकता सामने आने पर संबंधित विद्यार्थी को उसकी दृष्टि संबंधी जरूरत के अनुसार चश्मा उपलब्ध कराया जाएगा।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. जोगाराम ने बताया कि अभियान के दौरान यह तय करने के निर्देश दिए गए हैं कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर नेत्र जांच के लिए पहुंचने वाले किसी भी विद्यार्थी को बिना जांच किए वापस नहीं भेजा जाए। जांच के बाद जिन बच्चों को चश्मे की जरूरत होगी, उन्हें आवश्यकता के अनुसार चश्मा उपलब्ध कराया जाएगा।

उन्होंने बताया कि अभियान को प्रभावी बनाने के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग तथा शिक्षा विभाग के अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्या कई बार शुरुआत में सामने नहीं आ पाती। कक्षा में बोर्ड देखने, किताब पढ़ने या लिखने में परेशानी होने के बावजूद विद्यार्थी अपनी समस्या बता नहीं पाते। ऐसे में स्कूल स्तर पर नियमित स्क्रीनिंग से दृष्टि संबंधी परेशानी की समय रहते पहचान हो सकेगी।

पिछले वर्ष 71 हजार से अधिक बच्चों को चश्मे उपलब्ध कराने के बाद इस बार करीब 75 हजार जरूरतमंद विद्यार्थियों तक यह सुविधा पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

Share this story