जयंती समारोह में मीणा और पायलट ने बदली राजनीतिक संस्कृति पर उठाए सवाल

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जयंती समारोह में मीणा और पायलट ने बदली राजनीतिक संस्कृति पर उठाए सवाल


जयंती समारोह में मीणा और पायलट ने बदली राजनीतिक संस्कृति पर उठाए सवाल


जयपुर, 01 मार्च (हि.स.)। पूर्व मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर की जयंती पर रविवार को कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं ने वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था और चुनावी संस्कृति पर तीखी टिप्पणियां कीं। कार्यक्रम में टोंक-सवाई माधोपुर से सांसद हरीश मीणा और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने बदलते राजनीतिक हालात पर चिंता जताई।

हरीश मीणा ने कहा कि आज की राजनीति में हालात ऐसे हो गए हैं कि शिवचरण माथुर जैसे सादगीपूर्ण और स्पष्ट सोच वाले नेता सरपंच तक नहीं बन पाते। उन्होंने कहा कि आज पंचायत स्तर पर भी जातीय समीकरणों के आधार पर राजनीति होती है और उम्मीदवार की जाति तथा वोट बैंक पर सवाल पूछे जाते हैं। मीणा ने तंज कसते हुए कहा कि आज विधायक या सांसद बनते ही कोठियां और फार्म हाउस खड़े हो जाते हैं, जबकि पहले के मुख्यमंत्री सादगी से जीवन व्यतीत करते थे।

उन्होंने कहा कि पहले प्रशासनिक व्यवस्था में अनुशासन और मर्यादा थी। आजकल सुनने में आता है कि थाने का प्रभारी सीधे मुख्यमंत्री से बात करता है।

उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे स्वयं पुलिस अधीक्षक रहे, लेकिन उनकी मुख्यमंत्री तो दूर, महानिदेशक से भी सीधे बातचीत नहीं होती थी। वह अलग समय था, जब नीतियां स्पष्ट होती थीं और दिशा तय रहती थी।

मीणा ने कहा कि आज पार्टी कार्यकर्ताओं से लेकर अधिकारियों तक को स्पष्ट नहीं होता कि किस दिशा में काम करना है। जनता भी असमंजस में रहती है कि मार्गदर्शन किससे लिया जाए। उन्होंने शिवचरण माथुर की सादगी को याद करते हुए कहा कि वे श्याम नगर स्थित साधारण मकान में रहते थे और वहीं से इस दुनिया को विदा हुए।

वहीं सचिन पायलट ने भी बदलते राजनीतिक परिदृश्य पर अपनी बात रखते हुए कहा कि केवल नेताओं को दोष देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि आज न केवल विधायकों और सांसदों के, बल्कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के आवास भी किसी से कम नहीं हैं। इस पर भी गंभीरता से विचार होना चाहिए।

पायलट ने कहा कि चुनाव जीतने के बाद सरकार बनाने का उद्देश्य केवल सत्ता सुख नहीं होना चाहिए। मुखिया को कम से कम 70 प्रतिशत समय प्रशासन, क्रियान्वयन और विकास कार्यों में देना चाहिए, जबकि राजनीति के लिए सीमित समय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में स्थिति इसके उलट नजर आती है, जहां अधिक समय राजनीतिक समीकरण साधने में व्यतीत हो जाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि नीतिगत निर्णयों का कार्य कुछ चुनिंदा अधिकारियों पर छोड़ दिया गया है, जबकि जनप्रतिनिधियों को अपनी सोच और एजेंडे के साथ आगे बढ़कर लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए। देश में ऐसे नेताओं की संख्या कम होती जा रही है, जो स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ काम करें।

कार्यक्रम में कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बी.डी. कल्ला, डॉ. चंद्रभान, पूर्व मंत्री रघु शर्मा सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन उपस्थित रहे। वक्ताओं ने शिवचरण माथुर के जीवन से जुड़े प्रसंग साझा करते हुए उनके सादगीपूर्ण और जनोन्मुखी नेतृत्व को याद किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

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