ईपीएफओ - सामाजिक सुरक्षा में ऐतिहासिक सुधारों की ओर बड़ा कदम
उदयपुर, 10 जुलाई (हि.स.)। सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को अधिक व्यापक, समावेशी, पारदर्शी एवं तकनीक आधारित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक सुधार किये हैं। साथ ही नई रोजगार प्रोत्साहन योजनाएं भी लाभप्रद साबित हो रही हैं। यह बात शुक्रवार को यहां कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के क्षेत्रीय कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में अतिरिक्त केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त एवं अंचल प्रमुख (राजस्थान) अजीत कुमार ने कही।
उन्होंने कहा कि ईपीएफओ देश के करोड़ों श्रमिकों और कर्मचारियों को बेहतर सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है तथा नई योजनाओं के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा का दायरा पहले से कहीं अधिक विस्तृत होगा। इस अवसर पर क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त एवं क्षेत्रीय कार्यालय उदयपुर के प्रभारी पी. के. सिन्हा भी उपस्थित रहे।
अजीत कुमार ने बताया कि भारत सरकार ने श्रमिक कल्याण, आर्थिक विकास तथा ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस के बीच संतुलन स्थापित करने के उद्देश्य से 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को समाहित कर नई श्रम संहिताएँ लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े श्रम सुधारों में से एक है। इसका उद्देश्य प्रत्येक पात्र कर्मचारी तक सामाजिक सुरक्षा का लाभ पहुंचाना, अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाना, डिजिटल प्रशासन को बढ़ावा देना तथा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं उत्तरदायी बनाना है।
उन्होंने बताया कि 29 जून 2026 को सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अंतर्गत ईपीएफओ की तीन नई योजनाओं की अधिसूचना जारी की गई है। इनमें कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026, कर्मचारी पेंशन योजना, 2026 तथा कर्मचारी जमा संबद्ध बीमा (ईडीएलआई) योजना, 2026 शामिल हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य कर्मचारियों को मिलने वाले मूल सामाजिक सुरक्षा लाभों को यथावत रखते हुए प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाना है ताकि सेवाओं का लाभ समयबद्ध और प्रभावी ढंग से मिल सके।
प्रेस वार्ता में ईडीएलआई योजना, 2026 की प्रमुख विशेषताओं की जानकारी देते हुए बताया गया कि सदस्य की मृत्यु की स्थिति में उसके परिवार को अधिकतम सात लाख रुपए तक का बीमा सुरक्षा कवरेज मिलेगा। जिन सदस्यों ने 12 माह अथवा उससे अधिक सेवा पूरी कर ली है, उनके लिए न्यूनतम ढाई लाख रुपए का बीमा लाभ सुनिश्चित किया गया है। वहीं 12 माह से कम सेवा वाले सदस्यों के परिवारों को भी न्यूनतम 50 हजार रुपए का बीमा लाभ प्रदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त मृत्यु दावों के त्वरित निस्तारण के लिए समर्पित मृत्यु दावा प्रकोष्ठ की व्यवस्था भी की गई है, जिससे आश्रितों को शीघ्र राहत मिल सकेगी।
ईपीएफओ द्वारा एक जुलाई 2026 से 31 अक्टूबर 2026 तक विशेष कर्मचारी नामांकन अभियान (ईईसी-2026) भी संचालित किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य उन पात्र कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है जो संस्थानों में कार्यरत होने के बावजूद अब तक ईपीएफ कवरेज से बाहर रह गए थे। अभियान के अंतर्गत एक अप्रैल 2009 से 31 मार्च 2026 के बीच नियुक्त तथा वर्तमान में कार्यरत ऐसे कर्मचारियों को शामिल किया जाएगा जिनके वेतन से कभी कर्मचारी अंशदान नहीं काटा गया। ऐसे मामलों में कर्मचारी अंशदान को पूर्णतः माफ किया जाएगा तथा नियोक्ता को केवल अपना अंशदान, ब्याज एवं प्रशासनिक शुल्क जमा करना होगा। विलंब क्षति राशि मात्र 100 रुपए निर्धारित की गई है। इससे स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा मिलेगा तथा सामाजिक सुरक्षा का दायरा तेजी से बढ़ेगा।
प्रेस वार्ता में एमनेस्टी योजना-2026 की भी जानकारी दी गई। यह योजना उन प्रतिष्ठानों के लिए एक बार का विशेष अवसर है जो औपचारिक छूट अधिसूचना के बिना भविष्य निधि ट्रस्ट संचालित कर रहे हैं। योजना के अंतर्गत पात्र मामलों में पूर्व प्रभाव से ट्रस्ट की स्थिति का नियमितीकरण किया जाएगा। साथ ही न्यूनतम अनुपालन अवधि एवं कॉर्पस संबंधी शर्तों में भी छूट प्रदान की जाएगी। इससे वर्षों से लंबित विवादों और न्यायालयों में लंबित मामलों में कमी आने की उम्मीद है। इस योजना की प्रारंभिक अवधि छह माह निर्धारित की गई है।
विश्वास योजना-2026 का उद्देश्य विलंबित ईपीएफ अंशदान जमा कराने से जुड़े मामलों का सरल एवं त्वरित समाधान करना है। योजना के तहत विलंबित भुगतान पर लगने वाली क्षति राशि को तर्कसंगत बनाते हुए काफी कम कर दिया गया है। यह योजना 14 जून 2024 से पूर्व की अंशदान अवधि से संबंधित मामलों पर लागू होगी। योजना के अंतर्गत प्रकरणों का निस्तारण होने पर संबंधित लंबित मुकदमे एवं अपीलें समाप्त मानी जाएंगी, जिससे नियोक्ताओं की अनुपालन लागत घटेगी और विवाद समाधान प्रक्रिया अधिक सरल होगी।
प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएमवीबीआरवाई) की भी विस्तृत जानकारी दी गई। यह भारत सरकार की प्रमुख रोजगार आधारित योजना है, जिसका संचालन ईपीएफओ के माध्यम से किया जा रहा है। योजना का उद्देश्य औपचारिक रोजगार को बढ़ावा देना, पहली बार रोजगार प्राप्त करने वाले युवाओं को प्रोत्साहित करना तथा अतिरिक्त रोजगार सृजित करने वाले नियोक्ताओं को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।
योजना के अंतर्गत ईपीएफओ में पहली बार पंजीकरण कराने वाले तथा एक लाख रुपए प्रतिमाह तक वेतन प्राप्त करने वाले पात्र कर्मचारियों को छह माह की सेवा पूर्ण होने के बाद उनके खातों में सीधे प्रोत्साहन राशि हस्तांतरित की जाती है। इससे युवाओं को संगठित क्षेत्र में रोजगार अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलता है तथा वित्तीय समावेशन एवं दीर्घकालिक सामाजिक सुरक्षा को मजबूती मिलती है।
नियोक्ताओं के लिए भी यह योजना अत्यंत लाभकारी है। अतिरिक्त एवं स्थायी रोजगार सृजित करने वाले प्रतिष्ठानों को वित्तीय प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे उद्योगों को अधिक रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रेरणा मिल रही है। साथ ही औपचारिक रोजगार एवं ईपीएफ कवरेज का विस्तार भी तेजी से हो रहा है, जो विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
राजस्थान में योजना के प्रभावशाली परिणामों की जानकारी साझा करते हुए बताया गया कि वर्तमान में राज्य के 36,540 अंशदायी संस्थान ईपीएफओ से जुड़े हुए हैं। इनमें से 26,694 संस्थान प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के अंतर्गत पंजीकृत हो चुके हैं। अब तक 45 हजार से अधिक प्रथम बार रोजगार प्राप्त करने वाले युवाओं को इस योजना का लाभ मिल चुका है तथा उनके खातों में लगभग 21 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता सीधे जमा की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त अतिरिक्त रोजगार सृजित करने वाले 2,515 प्रतिष्ठानों को नियोक्ता प्रोत्साहन का लाभ प्रदान किया गया है।
प्रेस वार्ता के अंत में अतिरिक्त केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त अजीत कुमार ने उद्योगों, व्यापारिक संगठनों, नियोक्ताओं, कर्मचारियों एवं युवाओं से अपील की कि वे ईपीएफओ की विभिन्न योजनाओं एवं पहलों में सक्रिय भागीदारी करें। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा का व्यापक विस्तार, औपचारिक रोजगार में वृद्धि तथा श्रमिकों के भविष्य को सुरक्षित बनाना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। नई योजनाएँ इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहल हैं, जिनसे देश के लाखों कर्मचारियों एवं उनके परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता

