जोधपुर एम्स में महिला की किडनी से निकाली आठ गांठें
तीन साल पहले नौ निकाली थी, आंख और मस्तिष्क का भी हो चुका ऑपरेशन
जोधपुर, 08 अपै्रल (हि.स.)। जोधपुर एम्स के डॉक्टरों ने दुर्लभ जेनेटिक बीमारी से जूझती महिला के गुर्दे का सफल ऑपरेशन किया है। करीब 37 वर्षीय महिला का एम्स जोधपुर में बाएं तरफ की किडनी में हुई आठ गांठों को सफलतापूर्वक निकाला गया। महिला की दाहिनी किडनी से भी तीन साल पहले भी नौ ट्यूमर हटाए गए थे। महिला की पूर्व में आंख और मस्तिष्क से संबंधित सर्जरी भी हो चुकी है। इन भारी चुनौतियों के बावजूद, उन्होंने अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहते हुए रेगुलर डॉक्टरी सलाह और जांच का कड़ाई से पालन किया। इस बीमारी के कारण उनके दोनों गुर्दों में कई ट्यूमर निकल आए। तीन साल पहले, उनके दाहिने गुर्दे की सर्जरी हुई थी और नौ गांठें निकाली गई थीं। हाल ही में, एम्स जोधपुर में उनके बाएं गुर्दे के ट्यूमर के लिए एक और सफल सर्जरी की गई है जिसमें आठ गांठें सफलतापूर्वक निकाली गई हैं। उनका उपचार करने वाले यूरोलॉजी विभाग के अतिरिक्त आचार्य डॉ. गौतम राम चौधरी के अनुसार,यह रोग एक दुर्लभ जेनेटिक सिंड्रोम का हिस्सा है, जिसमें लगातार निगरानी की आवश्यकता होती है। ऐसे मरीजों को नियमित जांच की जरूरत होती है ताकि समय पर हस्तक्षेप किया जा सके।
डॉ. गौतम राम चौधरी ने कहा कि इस स्थिति से जुड़े गुर्दे के ट्यूमर के दोबारा विकसित होने की संभावना ज्यादा होती है। छोटे ट्यूमर केवल निगरानी में रखे जाते हैं, लेकिन जब वे तीन सेमी से बड़े हो जाते हैं, तो सर्जरी आवश्यक हो जाती है। मुख्य चुनौती यह होती है कि सभी दिखाई देने वाले ट्यूमर हटाए जाएं और ज्यादा से ज्यादा स्वस्थ गुर्दा ऊतक को सुरक्षित रखा जाए।
इसमें रोबोटिक सर्जरी को प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि यह सटीक होती है, रक्तस्राव कम होता है और बड़े निशान से बचाती है। एम्स जोधपुर के यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष, डॉ. एएस संधू ने इस तरह के रोगियों के लिए समग्र देखभाल के महत्व पर जोर दिया। इसी जरूरत को देखते हुए, विभाग ने फैमिलियल और सिंड्रोमिक जनिटो-यूरिनरी कैंसर क्लिनिक की स्थापना की है। यह क्लिनिक कई विशेषज्ञताओं को एक ही स्थान पर लाता है इस मौके पर सर्जरी टीम के अन्य सदस्यों में डॉ. महेंद्र सिंह, डॉ. शिवचरण नावरिया तथा डॉ. दीपक प्रकाश शामिल थे।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

