मातृभाषा में शिक्षा प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार: जस्टिस माथुर

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मातृभाषा में शिक्षा प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार: जस्टिस माथुर


जोधपुर, 11 जून (हि.स.)। जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के बृहस्पति भवन में थार लोक संस्कृति अध्ययन केंद्र के तत्वावधान में राजस्थानी भाषा के सम्मान एवं मातृभाषा आधारित शिक्षा को लेकर मातृभाषा राजस्थानी सम्मान समारोह आयोजित किया गया। समारोह में हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के उस महत्वपूर्ण निर्णय का स्वागत किया गया, जिसमें राजकीय एवं गैर-राजकीय शिक्षण संस्थानों में मातृभाषा के माध्यम से शिक्षण को बढ़ावा देने की बात कही गई है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय जोधपुर के पूर्व कुलपति जस्टिस एनएन माथुर ने कहा कि संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों में इस बात का उल्लेख है कि बच्चा अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करे प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार है।

उन्होंने कहा कि मातृभाषा में शिक्षा बच्चों के बौद्धिक विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। समारोह के केंद्र बिंदु रहे वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मनीष सिंघवी ने उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 350-ए का संदर्भ देते हुए कहा कि बच्चों को मातृभाषा में शिक्षा उपलब्ध कराना राज्य की जिम्मेदारी है। कुलपति प्रो. पवन कुमार शर्मा ने कहा कि लोक संस्कृति और भाषा एक-दूसरे की पूरक हैं। भाषा ही संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन का सबसे प्रभावी माध्यम है।

राजस्थानी भाषा आंदोलन के अग्रणी हस्ताक्षर प्रो. कल्याण सिंह शेखावत ने अपने उद्बोधन में कहा कि भाषा किसी जाति, वर्ग या क्षेत्र की बंधक नहीं होती। वरिष्ठ पत्रकार पदम मेहता ने कहा कि अपनी भाषा गौरव, ज्ञान और सांस्कृतिक चेतना का भंडार होती है। रोजगार और सूचना के साथ शिक्षा को मातृभाषा से जोडऩा समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

स्वागत उद्बोधन प्रो. महीपाल सिंह राठौड़ ने दिया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मीनाक्षी बोराणा ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ लक्ष्मण सिंह गड़ा ने किया।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

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