जर्जर भवन गिराने के एक साल बाद भी नया स्कूल भवन नहीं बना, टीन शेड में पढ़ने को मजबूर बच्चे

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जर्जर भवन गिराने के एक साल बाद भी नया स्कूल भवन नहीं बना, टीन शेड में पढ़ने को मजबूर बच्चे


डूंगरपुर, 12 अगस्त (हि.स.)। शिक्षा विभाग के ‘सब पढ़ें, सब बढ़ें’ के दावों के बीच ब्लॉक पाल देवल के ग्राम गरदुना स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय नवाघरा में बच्चे बुनियादी सुविधाओं के अभाव में पढ़ने को मजबूर हैं। विद्यालय का पुराना भवन करीब एक वर्ष पहले जर्जर घोषित कर गिरा दिया गया था, लेकिन अब तक नए भवन का निर्माण शुरू नहीं हो सका है। इसके चलते विद्यार्थी खुले आसमान और ग्रामीणों की ओर से लगाए गए अस्थायी टीन शेड के नीचे पढ़ाई कर रहे हैं।

विद्यालय ग्राम गरदुना के पीईईओ शिशोद क्षेत्र के अंतर्गत आता है। पुराने भवन को गिराए जाने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी कि जल्द ही नया भवन तैयार हो जाएगा, लेकिन एक साल बीतने के बावजूद निर्माण की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। बारिश, गर्मी और अन्य मौसम में बच्चों को अस्थायी व्यवस्था में ही पढ़ाई करनी पड़ रही है।

वर्तमान में मानसूनी बारिश के चलते विद्यार्थियों की परेशानी और बढ़ गई है। बारिश होने पर टीन शेड के नीचे पानी भर जाता है और बौछारें अंदर तक आने से बच्चों को बैठने में परेशानी होती है। गीली जमीन और टपकते शेड के कारण कई बार शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार खुले और असुरक्षित वातावरण में जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी बना रहता है।

ग्रामीण नारायण लाल डामोर ने बताया कि पुराने भवन को गिराए जाने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी कि जल्द नया भवन बन जाएगा, लेकिन करीब एक वर्ष बाद भी स्थिति जस की तस है। उन्होंने कहा कि नए भवन के निर्माण को लेकर अब तक ठोस बजटीय स्वीकृति और जमीनी कार्रवाई नहीं होने से विद्यार्थियों एवं अभिभावकों में रोष है।

ग्रामीणों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों से विद्यालय के नए भवन के निर्माण को तत्काल स्वीकृति देकर काम शुरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया गया तो वे धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा से जुड़े इस मामले में प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप कर स्थायी समाधान सुनिश्चित करना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष

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