रक्तदान का संकल्प बन सकता है किसी की जिंदगी का सहारा : डॉ. हिमांशु शर्मा

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रक्तदान का संकल्प बन सकता है किसी की जिंदगी का सहारा : डॉ. हिमांशु शर्मा


जयपुर, 12 जून (हि.स.)। विश्व रक्तदाता दिवस (14 जून) के अवसर पर फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल जयपुर के ब्लड सेंटर एवं ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. हिमांशु शर्मा ने कहा कि रक्तदान सबसे सुरक्षित, सरल और निःस्वार्थ सेवाओं में से एक है। एक यूनिट रक्तदान से दुर्घटना पीड़ितों, कैंसर मरीजों, सर्जरी कराने वाले रोगियों और गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं की जान बचाई जा सकती है। इसके बावजूद भय, भ्रांतियों और जागरूकता की कमी के कारण बड़ी संख्या में लोग रक्तदान से बचते हैं।

डॉ. शर्मा ने बताया कि रक्त को रेड सेल्स, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स में विभाजित किया जा सकता है, जिससे एक रक्त दाता कई मरीजों की मदद कर सकता है। भारत में रक्तदान के लिए व्यक्ति की आयु 18 से 65 वर्ष के बीच, वजन कम से कम 45 किलोग्राम तथा हीमोग्लोबिन 12.5 ग्राम प्रति डेसीलीटर या उससे अधिक होना चाहिए। इसके अलावा व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ हो और किसी संक्रमण या बुखार से ग्रसित न हो। उन्होंने बताया कि पुरुष प्रत्येक 90 दिन और महिलाएं प्रत्येक 120 दिन बाद रक्तदान कर सकती हैं। रक्तदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करते हुए उन्होंने कहा कि अधिकांश सामान्य दवाएं लेने वाले लोग रक्तदान कर सकते हैं। नियंत्रित ब्लड प्रेशर, मधुमेह (ओरल दवाओं के साथ), हाई कोलेस्ट्रॉल या गर्भनिरोधक दवाएं रक्तदान में बाधा नहीं हैं। हालांकि ब्लड थिनर, कीमोथेरेपी या सक्रिय संक्रमण की स्थिति में कुछ समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है।

टैटू बनवाने को लेकर फैली भ्रांति पर उन्होंने कहा कि यदि टैटू स्वच्छता मानकों का पालन करने वाले केंद्र में बनवाया गया हो तो तीन से छह माह बाद रक्तदान किया जा सकता है। वहीं कम वजन और दुबले शरीर वाले व्यक्ति भी, यदि उनका वजन निर्धारित सीमा में है और स्वास्थ्य अच्छा है, तो रक्तदान कर सकते हैं।

डॉ. शर्मा ने स्पष्ट किया कि रक्तदान से शरीर में स्थायी कमजोरी नहीं आती। शरीर कुछ ही दिनों में दान किए गए रक्त की पूर्ति कर लेता है। पर्याप्त पानी और हल्का भोजन लेने से रक्तदान के बाद होने वाली सामान्य असुविधाओं से बचा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि महिलाएं भी सुरक्षित रूप से रक्तदान कर सकती हैं। केवल मासिक धर्म के दौरान रक्तदान से बचने और निर्धारित अंतराल का पालन करने की सलाह दी जाती है। वहीं कोविड-19 संक्रमण से पूरी तरह स्वस्थ हो चुके लोग भी आवश्यक रिकवरी अवधि पूरी होने के बाद रक्तदान कर सकते हैं।

डॉ. शर्मा ने आमजन से नियमित स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आने की अपील करते हुए कहा कि रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प नहीं है और किसी भी समय किसी मरीज के जीवन को बचाने के लिए इसकी आवश्यकता पड़ सकती है। रक्तदान केवल एक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सबसे बड़ा माध्यम है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

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