ऐतिहासिक पहल: तीन गांवों के पंचों ने सुलझाया घाटाफला स्कूल खेल मैदान का सालों पुराना भूमि विवाद
डूंगरपुर, 15 जुलाई (हि.स.)। जिले की ग्राम पंचायत विकासनगर के गेंजीघाटा में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय (घाटाफला) के खेल मैदान की भूमि को लेकर पिछले दस वर्ष से चला आ रहा गंभीर विवाद आखिरकार आपसी भाईचारे और समझदारी की बदौलत पूरी तरह सुलझ गया है। विकासनगर ग्राम पंचायत के प्रशासक सुनील डिण्डोर की पहल पर तीन गांवों के पंचों, गमेतियों और सामाजिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति में एक ऐतिहासिक राजीनामा तैयार कर दोनों पक्षों के बीच चल रहे कानूनी विवादों को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया गया। इस आपसी सहमति के बाद अब विवादित जमीन के बदले खातेदारों को दूसरी जमीन दे दी गई है, जिससे बच्चों के लिए खेल मैदान का परकोटा (बाउंड्री वॉल) निर्माण कार्य अब सुचारू रूप से पूरा हो सकेगा।
दरअसल, यह पूरा मामला विद्यालय के नाम पर आवंटित करीब 8.5 बीघा खेल मैदान की जमीन पर खेलकूद प्रशिक्षण केंद्र और सार्वजनिक निर्माण विभाग के माध्यम से चल रहे बाउंड्री वॉल निर्माण से जुड़ा था। इस निर्माण कार्य को लेकर प्रथम पक्ष बाबूलाल पुत्र लालजी डेंडोर और नानुराम पुत्र मुका डेंडोर (निवासी गेंजीघाटा, थाना चौरासी) आपत्ति जता रहे थे। वर्ष 2006 में आयोजित एक राजस्व कैंप के दौरान प्रथम पक्ष को 4 बीघा जमीन का पट्टा आवंटित किया गया था, जिसका विद्यालय के खेल मैदान की भूमि के साथ सीमांकन को लेकर तकनीकी विवाद छिड़ गया था। यह विवाद पुलिस और न्यायालय तक पहुंच जाने के कारण खेल मैदान का विकास कार्य लंबे समय से ठप पड़ा हुआ था।
भविष्य में किसी भी वैमनस्य को रोकने के उद्देश्य से गेंजीघाटा, रांमैया और ढेंढिया तीनों गांवों के वार्ड पंचों, पटेलों, गमेतियों और लगभग 100 से अधिक बुजुर्गों व प्रबुद्ध नागरिकों ने एक जाजम पर बैठकर इस मामले में मध्यस्थता की। काफी विचार-विमर्श के बाद दोनों पक्षों के बीच सर्वसम्मति से बीच का रास्ता निकाला गया। इसके तहत प्रथम पक्ष बाबूलाल डेंडोर ने बच्चों के भविष्य और खेल मैदान के महत्व को समझते हुए, बिना किसी दबाव के अपनी विवादित जमीन को विद्यालय के लिए छोड़ दिया है, जिसके बदले में उन्हें खेल मैदान के पास ही दूसरी तरफ 4 बीघा सुरक्षित कृषि भूमि दे दी गई है। वहीं, आपसी सहमति बनते ही दोनों पक्षों ने थाने और न्यायालय में चल रहे सभी मुकदमों को तुरंत ससम्मान वापस लेने पर सहमति जताई है। इसके अलावा पुराने राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर नानुराम डेंडोर के खेत की सरहद से 20 फीट का आम रास्ता छोड़ते हुए उनकी 5 बीघा खातेदारी भूमि का भी शांतिपूर्वक सीमांकन कर दिया गया है।
इस ऐतिहासिक समझौते के बाद पंचों और ग्रामीणों ने तहसीलदार, गिरदावर और संबंधित पटवारी से मांग की है कि इस आपसी समझौते के अनुरूप मौके पर पहुंचकर जल्द से जल्द सीमांकन संशोधन की प्रक्रिया पूरी की जाए, जिससे राजस्व रिकॉर्ड को भी दुरुस्त किया जा सके। राजीनामा होने के बाद दोनों पक्षों सहित पूरे गांव में खुशी का माहौल है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष

