सरकारी उपेक्षा का शिकार डेडली स्कूल : जर्जर भवन और शिक्षकों की कमी से बच्चों का भविष्य अधर में, 3 कमरों में कैद 230 बच्चों की शिक्षा

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सरकारी उपेक्षा का शिकार डेडली स्कूल : जर्जर भवन और शिक्षकों की कमी से बच्चों का भविष्य अधर में, 3 कमरों में कैद 230 बच्चों की शिक्षा


सरकारी उपेक्षा का शिकार डेडली स्कूल : जर्जर भवन और शिक्षकों की कमी से बच्चों का भविष्य अधर में, 3 कमरों में कैद 230 बच्चों की शिक्षा


सरकारी उपेक्षा का शिकार डेडली स्कूल : जर्जर भवन और शिक्षकों की कमी से बच्चों का भविष्य अधर में, 3 कमरों में कैद 230 बच्चों की शिक्षा


सरकारी उपेक्षा का शिकार डेडली स्कूल : जर्जर भवन और शिक्षकों की कमी से बच्चों का भविष्य अधर में, 3 कमरों में कैद 230 बच्चों की शिक्षा


डूंगरपुर, 21 अगस्त (हि.स.)। जिले के बिछीवाड़ा ब्लॉक के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय डेडली, सुविधाओं के घोर अभाव और सरकारी उपेक्षा के कारण जर्जर हो चुका है। विद्यालय में व्याप्त शिक्षकों की भारी कमी और बुनियादी ढांचे के अभाव से 230 छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटक गया है। स्थिति इतनी विकट हो गई है कि शुक्रवार को ग्रामीणों और अभिभावकों का सब्र का बांध टूट गया और उन्होंने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर सरकार को चेतावनी दी है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह विद्यालय आसपास के गरीब और आदिवासी अंचल के बच्चों के लिए शिक्षा का एकमात्र महत्वपूर्ण केंद्र है। लेकिन वर्तमान में यहाँ विद्यार्थियों की संख्या के अनुरूप न तो पर्याप्त कक्षा-कक्ष हैं और न ही पढ़ाने वाले शिक्षक हैं। 230 बच्चों की शिक्षा का भार मात्र 5 शिक्षकों के कंधों पर है। विद्यालय के पास मात्र 3 कमरे हैं, जिनमें भी मिड-डे मील का सामान और विद्यालय का रिकॉर्ड ठूंसा हुआ है। स्थिति यह है कि बारिश के दौरान बरामदों में पानी टपकता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है। साथ ही चारदीवारी न होने से आवारा पशुओं का डर हमेशा बना रहता है।

ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि विद्यालय में कुल 13 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 8 पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। विद्यालय में प्रधानाचार्य, वरिष्ठ अध्यापक (हिंदी, अंग्रेजी, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान, संस्कृत) और कनिष्ठ सहायक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कोई नियुक्त नहीं है। छात्रों का कहना है कि विषय विशेषज्ञ न होने के कारण वे बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कैसे करें, यह उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। ग्रामीणों ने माध्यमिक स्तर के लिए भूगोल, इतिहास और अंग्रेजी साहित्य जैसे व्याख्याता पदों को भी सृजित करने की मांग की है।

ग्रामीणों और अभिभावकों ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और जनजाति मंत्री के नाम दिए ज्ञापन में कहा है कि आदिवासी क्षेत्र के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि यदि जल्द ही भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई और रिक्त पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। सामाजिक कार्यकर्ता मन्नालाल ननोमा, रणछोड़ भगोरा, बाबूलाल तराल, सोहन कटारा सहित दर्जनों ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि वे विद्यालय पर ताला लगाने या शिक्षा के अधिकार के लिए लोकतांत्रिक तरीके से उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि कई बार प्रशासन को अवगत कराने के बावजूद अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। शिक्षा विभाग के इस उपेक्षित रवैये ने अभिभावकों के भीतर भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले समय में क्षेत्र के बच्चों का भविष्य पूरी तरह से अंधकारमय हो जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष

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