डिजिटल पहचान ही भविष्य की शैक्षणिक पहचान का आधार : कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल

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डिजिटल पहचान ही भविष्य की शैक्षणिक पहचान का आधार : कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल


अजमेर, 30 सितम्बर (हि.सं.)। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर में शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के डिजिलॉकर-एनएडी/एबीसी के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को स्वराज सभागार में “अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (एबीसी) और एपीएएआर (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री) का कार्यान्वयन / डिजिटल इंडिया टॉक शो” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शैक्षणिक क्रेडिट प्रबंधन एवं विद्यार्थियों के डिजिटल अभिलेखों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा इनके प्रभावी क्रियान्वयन को प्रोत्साहित करना था।

कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि डिजिटल तकनीक आज प्रत्येक विद्यार्थी के जीवन का अभिन्न अंग बन चुकी है। डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच केवल तकनीकी सुविधा नहीं, बल्कि शैक्षणिक पहचान और भविष्य के अवसरों का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अधिकारियों से डिजिटल शिक्षा व्यवस्था को गंभीरता से समझने और इसमें सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एबीसी, अपार एवं डिजिलॉकर जैसी व्यवस्थाएं केवल शिक्षकों या परीक्षा नियंत्रक कार्यालय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका सीधा संबंध विद्यार्थियों के शैक्षणिक जीवन और भविष्य से है।

कुलगुरु ने विद्यार्थियों को विशेषज्ञों से खुलकर प्रश्न पूछने और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि जिज्ञासा ही सीखने की प्रक्रिया को प्रभावी बनाती है। उन्होंने भारत सरकार एवं राजस्थान सरकार द्वारा डिजिटल शिक्षा को प्रोत्साहित करने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से इन पहलों का सक्रिय हिस्सा बनने का आग्रह किया।

कार्यशाला में डिजिलॉकर-एनएडी/एबीसी की राज्य समन्वयक स्वर्ण प्रभा स्वैन ने मुख्य वक्तव्य देते हुए एबीसी एवं अपार की भूमिका और डिजिटल शैक्षणिक पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ये प्लेटफॉर्म विद्यार्थियों को अपने शैक्षणिक अभिलेख सुरक्षित रखने, प्राप्त करने एवं स्थानांतरित करने की सुविधा प्रदान करते हैं, जिससे उच्च शिक्षा में लचीलापन, पारदर्शिता और सुगमता सुनिश्चित होती है।

तकनीकी सत्रों में एबीसी, नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी (एनएडी), डिजिलॉकर एवं अपार आईडी की कार्यप्रणाली का विस्तृत प्रदर्शन किया गया। विशेषज्ञों एवं डिजिलॉकर तकनीकी दल ने पंजीकरण प्रक्रिया, संस्थागत एकीकरण तथा विद्यार्थियों की सहभागिता से संबंधित व्यावहारिक जानकारी प्रदान की। विद्यार्थियों की अधिक संख्या को देखते हुए कार्यशाला दो सत्रों में आयोजित की गई, ताकि सभी प्रतिभागियों को विषय समझने और अपनी शंकाओं का समाधान प्राप्त करने का पर्याप्त अवसर मिल सके।

कार्यशाला में विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, अतिथि संकाय, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. विनोद कुमार जैन, एसीपी एवं कार्यशाला समन्वयक ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विवेक शर्मा ने किया तथा संयोजन प्रो. सुब्रतो दत्ता ने किया। अंत में संवाद सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने डिजिटल शैक्षणिक व्यवस्था के क्रियान्वयन से संबंधित प्रश्न पूछे और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष

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