शिक्षकों को टीइटी की अनिवार्यता से मुक्त करने की मांग
धौलपुर, 18 जून (हि.स.)। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, विद्यालय शिक्षा (राजस्थान) की जिला शाखा धौलपुर ने बृहस्पतिवार को धौलपुर जिला कलेक्ट्रेट पर धरना दिया। धरना एवं प्रदर्शन के बाद महासंघ की ओर से प्रधानमंत्री एवं शिक्षा मंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को टीइटी की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त किए जाने की मांग की गई है।
संगठन के जिला अध्यक्ष देवेश प्रसाद शर्मा ने बताया कि 23 अगस्त 2010 को एनसीटीई द्वारा जारी टीइटी अधिसूचना और उसके संदर्भ में 29 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के उपरांत देश भर के शिक्षकों में भारी असुरक्षा की भावना व्याप्त है। महासंघ ने स्पष्ट किया कि भारतीय विधिक व्यवस्था के अनुसार कोई भी नियम सामान्यतः भविष्यलक्षी होता है। वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की नियुक्तियाँ उस समय के प्रचलित नियमों और योग्यता मानदंडों के अनुसार पूर्णतः वैध थीं, जिन्हें अब बाद में बनी पात्रता शर्तों के आधार पर प्रभावित करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
संगठन के जिला मंत्री पुरुषोत्तम शर्मा ने बताया कि ज्ञापन में शिक्षकों की प्रमुख मांगों के संबंध में बताया कि 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को टीइटी की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त किया जाए। इसके साथ ही वर्षों से राष्ट्र निर्माण में जुटे इन शिक्षकों की वरिष्ठता, पदोन्नति और अन्य सभी वैधानिक लाभों को पूर्ण संरक्षण प्रदान किया जाए। इसके साथ ही संसद में आवश्यक विधायी संशोधन या विशेष प्रावधान लाकर इस वर्ग को इस संकट से स्थायी मुक्ति दिलाई जाए। केंद्र सरकार द्वारा सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं ताकि शिक्षकों में व्याप्त असमंजस की स्थिति का तत्काल निराकरण हो सके। धरना एवं प्रदर्शन के बाद में संगठन के प्रतिनिधि मंडल ने अपर जिलाधिकारी हरिराम मीणा को ज्ञापन सोंपा। धरना एवं प्रदर्शन में जिले भर के खंड अध्यक्षों, पदाधिकारियों एवं बड़ी संख्या में शिक्षक प्रतिनिधियों ने भाग लेकर अपनी एकजुटता का परिचय दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रदीप

