निजी स्वास्थ्य संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं सुनिश्चित कराएं : डीएम

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निजी स्वास्थ्य संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं सुनिश्चित कराएं : डीएम


धौलपुर, 03 जून (हि.स.)। जिले के निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम एवं सोनोग्राफी सेंटर संचालकों की समीक्षा बैठक बुधवार को जिला कलक्ट्रेट सभागार में आयोजित की गई। बैठक में निजी स्वास्थ्य संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही, मरीजों की सुरक्षा तथा गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं सुनिश्चित करने के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई तथा आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए गए।

इस मौके पर जिला कलक्टर श्रीनिधि बी टी ने कहा कि आमजन को बेहतर एवं सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी निजी अस्पतालों एवं नर्सिंग होम संचालकों को निर्देश दिए कि संस्थान के बाहर संचालक एवं चिकित्सकों के नाम, फोटो, योग्यता तथा पंजीकरण संख्या स्पष्ट एवं प्रमुखता से प्रदर्शित की जाए, ताकि मरीजों एवं उनके परिजनों को उपचार देने वाले चिकित्सकों की जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सके।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक निजी अस्पताल में चौबीसों घंटे योग्य चिकित्सा अधिकारी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। गंभीर एवं जटिल मरीजों को आवश्यकता पड़ने पर समय रहते उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर किया जाए, ताकि उपचार में अनावश्यक विलंब न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि मरीजों के उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही या निर्धारित मानकों की अवहेलना को गंभीरता से लिया जाएगा। जिला कलक्टर ने स्वास्थ्य संस्थानों में पारदर्शी एवं उत्तरदायी कार्यप्रणाली अपनाने पर बल देते हुए कहा कि सभी संस्थान अपने अभिलेखों, पंजीकरण दस्तावेजों एवं अन्य आवश्यक रिकॉर्ड को अद्यतन रखें। साथ ही अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं, उपकरणों एवं मानव संसाधनों का विवरण भी निर्धारित मानकों के अनुरूप संधारित किया जाए।

बैठक में वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा गया कि चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, तकनीकी कर्मचारियों एवं बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन से जुड़े कार्मिकों को सभी भुगतान डिजिटल अथवा ऑनलाइन माध्यम से ही किए जाएं। इससे वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता बनी रहेगी तथा आवश्यक रिकॉर्ड का संधारण भी सुगम होगा। जिला कलक्टर ने निर्देश दिए कि निजी अस्पतालों में ऑपरेशन के माध्यम से जन्म लेने वाले प्रत्येक नवजात शिशु की सूचना संबंधित चिकित्सक के विवरण सहित चिकित्सा विभाग के निर्धारित व्हाट्सएप समूह में अनिवार्य रूप से साझा की जाए, जिससे जन्म संबंधी आंकड़ों का समयबद्ध संकलन एवं निगरानी सुनिश्चित की जा सके। बैठक में उपस्थित सभी सोनोग्राफी सेंटर संचालकों को पीसीपीएनडीटी अधिनियम एवं नियमों की पूर्ण पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

जिला कलक्टर ने कहा कि लिंग चयन एवं भ्रूण लिंग जांच जैसी अवैध गतिविधियों के विरुद्ध राज्य सरकार की शून्य सहनशीलता की नीति है तथा अधिनियम के उल्लंघन की स्थिति में नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सोनोग्राफी केन्द्रों में सभी आवश्यक अभिलेखों एवं प्रपत्रों का नियमित संधारण करने तथा रिकॉर्ड को अद्यतन रखने के निर्देश भी दिए। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. धर्म सिंह मीणा ने बताया कि केवल राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीकृत चिकित्सकों को ही चिकित्सकीय कार्य करने की अनुमति है। अन्य राज्यों में पंजीकृत चिकित्सकों को निर्धारित अवधि में राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस अवसर पर प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. समरवीर सिंह सिकरवार, उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ चेतराम मीणा, पीएमओ बाड़ी डॉ. हरकिशन मंगल एवं वरिष्ठ शल्य चिकित्सक डॉ. शिवचरण सिंह कुशवाहा सहित निजी अस्पताल एवं नर्सिंग होम संचालक, चिकित्सक तथा सोनोग्राफी सेंटर संचालक उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रदीप

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