जयपुर में माली-सैनी समाज का प्रदर्शन, 12 प्रतिशत आरक्षण की मांग पर आंदोलन स्थगित

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जयपुर में माली-सैनी समाज का प्रदर्शन, 12 प्रतिशत आरक्षण की मांग पर आंदोलन स्थगित


जयपुर में माली-सैनी समाज का प्रदर्शन, 12 प्रतिशत आरक्षण की मांग पर आंदोलन स्थगित


जयपुर, 25 फ़रवरी (हि.स.)। माली-सैनी समाज ने अलग से 12 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर मंगलवार को विधानसभा के पास जोरदार प्रदर्शन और धरना दिया। राज्यभर से आए हजारों समाजजनों ने घेराव कर अपनी 11 सूत्रीय मांगें सरकार के समक्ष रखीं। देर शाम मुख्यमंत्री से आश्वासन और सरकार के प्रतिनिधियों के साथ सकारात्मक वार्ता के बाद आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया गया।

आरक्षण संघर्ष समिति के आह्वान पर माली, सैनी, कुशवाह, शाक्य, मौर्य और सुमन समाज के लोग जन अधिकार यात्रा के माध्यम से जयपुर पहुंचे। संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष सीपी सैनी ने बताया कि भरतपुर से शुरू हुई यह यात्रा गांव-गांव और शहर-शहर से होते हुए राजधानी पहुंची। उन्होंने कहा कि समाज की मांगें लंबे समय से लंबित हैं, जबकि प्रदेश की सौ से अधिक विधानसभा सीटों पर समाज के मतदाता प्रभावी संख्या में हैं। पूर्ववर्ती सरकार के समय भी केवल आश्वासन मिला, ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

यात्रा घाट की गूणी, आगरा रोड, सीकर रोड, अजमेर रोड और कोटा राजमार्ग से गुजरते हुए विधानसभा के पास बाइस गोदाम पहुंची, जहां सभा आयोजित की गई। शाम तक नेताओं ने जाम लगाने का निर्णय भी लिया और मुख्यमंत्री से वार्ता की मांग रखी। रात करीब 7 बजे प्रतिनिधिमंडल को विधानसभा में बुलाया गया, जहां मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से फोन पर बातचीत कराई गई। मुख्यमंत्री ने होली के बाद मुख्यमंत्री निवास पर विस्तृत बैठक का आश्वासन दिया। इस दौरान सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत और भाजपा विधायक भागचंद टांकड़ा के साथ भी चर्चा हुई।

संघर्ष समिति के महामंत्री विनोद भूदोली ने कहा कि सरकार से सकारात्मक वार्ता हुई है, लेकिन यदि आश्वासन पर अमल नहीं हुआ तो आगे आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। प्रदेशाध्यक्ष सीपी सैनी ने आंदोलन में शामिल समाजजनों का आभार जताया।

वार्ता के दौरान सरकार की ओर से आरक्षण के लिए कमेटी गठित करने, फुले बोर्ड व लवकुश बोर्ड की बहाली हेतु उच्च स्तरीय समिति बनाने, सैनी रेजिमेंट के गठन के लिए सेना से आंकड़े प्राप्त करने तथा महात्मा ज्योतिबा फुले दंपति को भारत रत्न दिलाने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखने का आश्वासन दिया गया। आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को गुर्जर आंदोलन की तर्ज पर वापस लेने के लिए भी समिति गठित करने पर सहमति बनी।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

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