डूंगरपुर रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की मांग ने पकड़ा जोर; बीएपी सांसद और विधायकों ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र
डूंगरपुर, 09 जुलाई (हि.स.)। स्थानीय रेलवे स्टेशन का नामकरण क्षेत्र के संस्थापक राजा डूंगर बरंडा के नाम पर करने की मांग को लेकर वागड़ अंचल में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। इस संबंध में बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा सीट से भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के सांसद राजकुमार रोत, आसपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक उमेश डामोर और चौरासी से विधायक अनिल कुमार कटारा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को अलग-अलग पत्र भेजकर अपनी आधिकारिक सहमति और प्रस्ताव सौंपे हैं। जनप्रतिनिधियों ने इसे स्थानीय जनभावनाओं और ऐतिहासिक न्याय के अनुरूप बताते हुए जल्द से जल्द प्रशासनिक स्वीकृति जारी करने की मांग की है।
सांसद राजकुमार रोत ने अपने पत्र में लिखा कि डूंगरपुर की स्थापना राजा डूंगर बरंडा द्वारा की गई थी और उन्हीं के नाम पर इस जिले की पहचान है। वे इस क्षेत्र की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक धरोहर के मुख्य स्तंभ हैं। सांसद रोत ने बताया कि वे इस विषय को पहले भी लोकसभा में उठा चुके हैं और क्षेत्रवासियों व सामाजिक संगठनों की लंबे समय से चली आ रही इस मांग का सम्मान करते हुए डूंगरपुर रेलवे स्टेशन का नाम 'राजा डूंगर बरंडा रेलवे स्टेशन' करने के पक्ष में अपनी पूर्ण सहमति व्यक्त करते हैं।
दूसरी ओर बीएपी के विधायक उमेश डामोर और अनिल कुमार कटारा ने स्टेशन का नाम भील राजा डूंगर बरंडा रेलवे स्टेशन करने की पुरजोर वकालत की है। मुख्यमंत्री को भेजे पत्रों में दोनों विधायकों ने तर्क दिया कि भील राजा डूंगर बरंडा आदिवासी समाज के गौरव, शौर्य, स्वाभिमान और सांस्कृतिक अस्मिता के प्रतीक हैं। उन्होंने मातृभूमि और स्वशासन की रक्षा के लिए कड़ा संघर्ष किया था। विधायकों का कहना है कि देश भर में महापुरुषों और जननायकों को सम्मानित करने की परंपरा के तहत डूंगरपुर स्टेशन का यह नामकरण न केवल आदिवासी समाज की सदियों पुरानी आकांक्षाओं को पूरा करेगा, बल्कि नई पीढ़ी को इस गौरवशाली और अमिट इतिहास से परिचित कराने का एक प्रभावी माध्यम भी बनेगा। सभी जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से इस प्रस्ताव को शीघ्र सैद्धांतिक मंजूरी देकर संबंधित विभाग को आवश्यक निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष

