एआई आधारित सुशासन पर हुआ मंथन, स्थानीय भाषा में सुशासन को बढ़ावा देने पर जोर
जयपुर, 01 जुलाई (हि.स.)। 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन के तहत राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित प्रथम प्लेनरी सत्र का विषय 'एआई बेस्ड गवर्नेंस फॉर ऑल' रहा।
सत्र के अध्यक्ष एवं प्रथम पैनलिस्ट, केन्द्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि आमजन को शासन-प्रशासन से जुड़े कार्य अपनी मातृभाषा में करने की सुविधा मिलनी चाहिए, न कि ऐसी भाषा में जिसके लिए उन्हें अनुवादक की आवश्यकता पड़े। उन्होंने कहा कि भाषिणी जैसे एआई आधारित प्लेटफॉर्म विभिन्न भाषाओं एवं बोलियों में अनुवाद की सुविधा प्रदान कर स्थानीय भाषा में प्रभावी सुशासन का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सीपी ग्राम जैसे ऐप न्यायिक कार्यवाहियों के स्थानीय भाषाओं में अनुवाद में भी सहायक हैं, जिससे आमजन को अपनी मातृभाषा में न्याय प्राप्त करने में सुविधा मिल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न सरकारी विभागों के बड़े डेटा सेट्स को एआई की सहायता से एकीकृत एवं व्यवस्थित कर बेहतर डेटा गवर्नेंस सुनिश्चित करने तथा सरकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के प्रयास किए जा रहे हैं।
द्वितीय पैनलिस्ट, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में वैज्ञानिक-जी एवं एआई एवं इमर्जिंग टेक्नोलॉजी की प्रमुख कविता भाटिया ने कहा कि भारत 60 लाख एआई वर्कफोर्स और 2 लाख स्टार्टअप्स के साथ वैश्विक स्तर पर एआई महाशक्ति के रूप में उभर रहा है। उन्होंने बताया कि एआई वाइब्रेंसी के मामले में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर है। देश की चुनौतियों के समाधान के लिए एआई आधारित, स्केलेबल एवं नागरिक-केंद्रित समाधान विकसित किए जा रहे हैं। कई राज्य सरकारें सड़कों के गड्ढों की पहचान, बेहतर सड़क अवसंरचना की आवश्यकता वाले क्षेत्रों का निर्धारण तथा अन्य सार्वजनिक सेवाओं में एआई का प्रभावी उपयोग कर रही हैं। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी नागरिक सेवाओं के लिए एआई का उपयोग अब अनिवार्य बनता जा रहा है।
तृतीय पैनलिस्ट एन.एस.एन. मूर्ति, गवर्नमेंट एंड पब्लिक सर्विसेज कंसल्टिंग लीडर, डेलॉइट ने कहा कि एआई के माध्यम से समाज के वंचित एवं कमजोर वर्गों को बड़े पैमाने पर सशक्त बनाया जा सकता है। उन्होंने किसानों, दिव्यांगजनों तथा अन्य जरूरतमंद वर्गों को एआई आधारित समाधानों से प्राप्त हो रहे लाभों के उदाहरण प्रस्तुत किए।
वहीं, चतुर्थ पैनलिस्ट अर्नव कपूर, डिप्टी डायरेक्टर (पॉलिसी, कम्युनिकेशंस एवं फिलैंथ्रॉपिक पार्टनरशिप्स), गेट्स फाउंडेशन ने कहा कि एआई दुनिया का सबसे बड़ा 'इक्वलाइजर' साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि एआई तक सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करना आवश्यक है, साथ ही लोगों में विश्वास का निर्माण भी उतना ही महत्वपूर्ण है ताकि धोखाधड़ी की आशंका के कारण वे एआई के उपयोग से भयभीत न हों।
पंचम पैनलिस्ट प्रदीप सिंह, प्रोग्राम डायरेक्टर/एडवाइजर (ग्रीन ट्रांजिशन, क्लाइमेट एंड एनवायरनमेंट, आईटी एवं टेलीकॉम), नीति आयोग ने नीति फ्रंटियर टेक हब की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह पहल भारत में एआई आधारित सुशासन को गति देने और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि नई प्रौद्योगिकियों के प्रभावी उपयोग से शासन को अधिक पारदर्शी, दक्ष और नागरिक-केंद्रित बनाया जा सकता है।
सत्र के अंत में प्रतिभागियों एवं विशेषज्ञों के बीच प्रश्नोत्तर का आयोजन किया गया, जिसमें एआई आधारित सुशासन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई। राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास भी सत्र के दौरान उपस्थित रहे। समापन अवसर पर सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग के विशिष्ट सचिव एवं आयुक्त हिमांशु गुप्ता ने सभी पैनलिस्टों को स्मृति-चिह्न भेंट किए।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव

