नशा मुक्ति जागरूकता कार्यशाला एवं गंगानगर मैराथन रजिस्ट्रेशन कैंप आयोजित

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नशा मुक्ति जागरूकता कार्यशाला एवं गंगानगर मैराथन रजिस्ट्रेशन कैंप आयोजित


श्रीगंगानगर, 13 अक्टूबर (हि.स.)। जिला कलक्टर डॉ. अमित यादव एवं जिला पुलिस अधीक्षक हरिशंकर के नेतृत्व में जारी नशा मुक्त श्रीगंगानगर अभियान के तहत एवरग्रीन डिफेंस एकेडमी सूरतगढ़ में नशा मुक्ति जागरूकता वर्कशॉप एवं गंगानगर मैराथन रजिस्ट्रेशन कैंप आयोजित किया गया। कार्यक्रम में युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करते हुए उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, बुरी आदतों से दूर रहने और नशा मुक्त श्रीगंगानगर के संकल्प से जुड़ने का आह्वान किया गया। इस अवसर पर युवाओं को आगामी गंगानगर मैराथन में भाग लेने के लिए प्रेरित करते हुए इसे स्वस्थ, जागरूक और नशा मुक्त समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया गया।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के विक्रम ज्याणी ने कहा कि हमारा जीवन अच्छी और बुरी आदतों से मिलकर बनता है। हमारे व्यक्तित्व की असली पहचान इस बात से होती है कि हम किन आदतों को अपने जीवन में प्रभावी होने देते हैं। हर इंसान के भीतर राम और रावण, दोनों प्रकार की प्रवृत्तियां मौजूद होती हैं। एक तरफ विवेक, संस्कार, अनुशासन और अच्छाई का रास्ता है, तो दूसरी तरफ लालच, गलत संगत और आत्मविनाश की ओर ले जाने वाली आदतें हैं। हम जिस प्रवृत्ति को लगातार जीना शुरू कर देते हैं, धीरे-धीरे हमारा व्यक्तित्व भी वैसा ही बन जाता है।”

ज्याणी ने नशे के खतरे पर बात करते हुए कहा कि बुरी आदतों में सबसे खतरनाक आदत सिंथेटिक नशे की है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती तब शुरू होती है, जब कोई युवा सोचता है कि मैं तो सिर्फ एक बार करके देख रहा हूं, मुझे इसकी आदत नहीं लगेगी या जब चाहूंगा, तब छोड़ दूंगा। यही सोच धीरे-धीरे जिंदगी की सबसे बड़ी भूल बन सकती है। नशे की लत हमेशा व्यक्ति की इच्छा के अनुसार नहीं चलती। कई बार व्यक्ति छोड़ना चाहता है, लेकिन निर्भरता उसे बार-बार उसी अंधेरे में खींच ले जाती है।

कोच गुरुप्रीत सिंह मान ने कहा कि नशा मुक्त समाज के निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। युवा स्वयं नशे से दूर रहने का संकल्प लें और अपने मित्र को भी गलत रास्ते पर जाने से रोकें। सच्चा मित्र वही है, जो गलत काम में साथ देने के बजाय सही रास्ते पर चलने का साहस दे।

इस अवसर पर बताया गया कि मैराथन केवल दौड़ने की प्रतियोगिता नहीं, बल्कि अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण, अनुशासन, आत्मविश्वास और स्वस्थ जीवनशैली का प्रतीक है। गंगानगर मैराथन को नशा मुक्त श्रीगंगानगर के संकल्प से जोड़ते हुए युवाओं से अपील की गई कि वे स्वयं भी भागीदारी निभाएं और अपने मित्रों, परिवारजनों तथा आसपास के लोगों को भी इस सकारात्मक पहल से जोड़ें।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव

Livevns.news Desk
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