डिजिटल जनगणना के नाम पर की जा रही है साइबर ठगी

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डिजिटल जनगणना के नाम पर की जा रही है साइबर ठगी


जयपुर, 16 अप्रैल (हि.स.)। केंद्र सरकार द्वारा शुरू की जा रही डिजिटल जनगणना की आड़ में साइबर अपराधी सक्रिय हो गए हैं। आमजन को ठगी से बचाने के लिए अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम वीके सिंह के निर्देशानुसार साइबर क्राइम शाखा ने एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। साइबर अपराधी जनगणना अधिकारी बनकर संदिग्ध लिंक या फर्जी कॉल के जरिए लोगों के बैंक खातों में सेंध लगा सकते हैं।

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया कि अपराधी खुद को जनगणना अधिकारी बताकर फर्जी कॉल कर आपके परिवार की जानकारी, आधार और बैंक डिटेल्स मांगते हैं। वे ऐनी डेस्क या टीम वीवर जैसे स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड करवा कर आपके फोन का पूरा कंट्रोल ले लेते हैं और पल भर में बैंकिंग ऐप्स से पैसे उड़ा देते हैं। इसके अलावा कुछ मामलों में ठग घर आकर टैबलेट पर जानकारी भरने का नाटक करते हैं। वे सदस्यों की शिक्षा और सुविधाओं की जानकारी दर्ज करने के बहाने आपसे ओटीपी मांगते हैं, जो असल में आपके बैंक ट्रांजेक्शन का हो सकता है।

इसके अलावा अपनी जनगणना अपडेट करें, वरना सरकारी सुविधा बंद हो जाएगी जैसे डरावने संदेशों के साथ एक लिंक भेजा जाता है। इस पर क्लिक करते ही आप साइबर ठगी का शिकार हो सकते हैं।

उपमहानिरीक्षक पुलिस साइबर क्राइम शांतनु कुमार सिंह ने बताया कि भारत सरकार द्वारा डिजिटल जनगणना के तहत स्व-गणना)की सुविधा दी गई है। इसके लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा करें।

सिंह ने बताया कि स्व-गणना की अवधि 01 मई 2026 से 15 मई 2026 है, ध्यान रखें जनगणना पूरी तरह निःशुल्क है; किसी भी प्रकार की फीस या भुगतान नहीं लिया जाता। यदि कोई वेरिफिकेशन कोड या क्यूआर कोड के बहाने पैसे मांगे तो वह अपराधी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

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