राजस्थान पुलिस ने ‘बॉस स्कैम’ से सावधान रहने की अपील की

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राजस्थान पुलिस ने ‘बॉस स्कैम’ से सावधान रहने की अपील की


जयपुर, 31 अगस्त (हि.स.)। महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने आमजन और विशेष रूप से कंपनियों में कार्यरत मैनेजर, अकाउंटेंट एवं अन्य कर्मचारियों को फर्जी बॉस बनकर की जाने वाली साइबर ठगी यानी ‘बॉस स्कैम’ से सावधान रहने की अपील की है।

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया कि साइबर ठग सोशल इंजीनियरिंग तकनीक का इस्तेमाल कर कंपनी के बॉस, वरिष्ठ अधिकारी अथवा बिजनेस पार्टनर बनकर व्हाट्सएप, ई-मेल या एसएमएस के माध्यम से संपर्क करते हैं। इसके बाद तत्काल धनराशि ट्रांसफर करने, गिफ्ट कार्ड खरीदने, डेटा साझा करने अथवा गोपनीय जानकारी उपलब्ध कराने का दबाव बनाया जाता है।

उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी पहले कंपनी, उसके प्रमुख अधिकारियों, ई-मेल पैटर्न, संपर्कों और सोशल मीडिया से जुड़ी जानकारी जुटाते हैं। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारी की पहचान अपनाकर कर्मचारी से संपर्क करते हैं। विश्वास पैदा करने के लिए असली नाम, पद, प्रोजेक्ट और अन्य वास्तविक जानकारियों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे कर्मचारी को संदेश वास्तविक होने का भ्रम हो जाता है।

एडीजी सिंह ने बताया कि साइबर ठग कार्यालय के लैपटॉप या डेस्कटॉप पर ट्रोजन हॉर्स मालवेयर के जरिए जानकारी हासिल करने का प्रयास कर सकते हैं। यदि डेस्कटॉप व्हाट्सएप से लिंक है तो वे क्यूआर कोड को हाईजैक कर व्हाट्सएप पर अपनी फोटो लगाकर कर्मचारी को बॉस के नाम से धनराशि ट्रांसफर करने का संदेश भेज सकते हैं।

इसके बाद ठग तत्काल भुगतान, गिफ्ट कार्ड खरीदने, डेटा ट्रांसफर करने या गोपनीय जानकारी उपलब्ध कराने का दबाव बनाते हैं। ठगी की रकम को म्यूल अकाउंट, क्रिप्टो अथवा नगद निकासी के माध्यम से आगे स्थानांतरित किया जा सकता है।

राजस्थान पुलिस ने ऐसे साइबर फ्रॉड की पहचान के लिए कुछ महत्वपूर्ण संकेत बताए हैं। इनमें ई-मेल एड्रेस में अचानक या मामूली बदलाव, कार्यालय समय के बाद असामान्य तरीके से संपर्क, अत्यधिक अर्जेंट अथवा गोपनीय लेनदेन का दबाव, किसी नए या अज्ञात बैंक खाते में तुरंत पैसे ट्रांसफर करने का निर्देश, फोन या वीडियो कॉल पर बात करने से बचना तथा भाषा और ग्रामर में असामान्य गलतियां शामिल हैं। व्हाट्सएप, ई-मेल अथवा कॉल पर असामान्य वित्तीय निर्देश मिलना भी खतरे का संकेत हो सकता है।

राजस्थान पुलिस ने कहा कि किसी भी वित्तीय अथवा डेटा संबंधी अनुरोध की पुष्टि व्यक्तिगत रूप से या संबंधित व्यक्ति के आधिकारिक फोन नंबर पर कॉल करके जरूर करें। केवल व्हाट्सएप अथवा ई-मेल पर प्राप्त निर्देश के आधार पर कोई भुगतान नहीं किया जाना चाहिए।

पुलिस ने डिस्प्ले नेम देखकर भरोसा करने के बजाय पूरा ई-मेल एड्रेस और डोमेन नेम ध्यानपूर्वक जांचने की सलाह दी है। कंपनियों को उच्च-मूल्य अथवा असामान्य भुगतान के लिए मल्टीलेवल अप्रूवल सिस्टम लागू करने तथा केवल स्वीकृत भुगतान प्रक्रियाओं एवं अधिकृत संचार माध्यमों का इस्तेमाल करने को कहा गया है।

राजस्थान पुलिस ने कर्मचारियों को व्हाट्सएप वेब और लिंक्ड डिवाइसेज के अनावश्यक सेशन लॉगआउट करने, सिस्टम, एंटीवायरस एवं सुरक्षा सॉफ्टवेयर को अपडेट रखने तथा व्हाट्सएप पर टू फैक्टर वेरीफिकेशन सक्रिय रखने की सलाह दी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव

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