समय पर पहचान और आधुनिक उपचार से बढ़ रहा ब्लड कैंसर का क्योर रेट: डॉ. प्रकाश सिंह

WhatsApp Channel Join Now
समय पर पहचान और आधुनिक उपचार से बढ़ रहा ब्लड कैंसर का क्योर रेट: डॉ. प्रकाश सिंह


जयपुर, 25 सितंबर (हि.स.)। ब्लड कैंसर कई प्रकार का होता है और बीमारी के प्रकार के अनुसार इसके लक्षण भी अलग-अलग हो सकते हैं। समय पर लक्षणों की पहचान, जांच और उचित उपचार शुरू होने से मरीज के कैंसर मुक्त होने की संभावना बढ़ती है। ब्लड कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रकाश सिंह शेखावत ने बताया कि सितंबर को ब्लड कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य ल्यूकेमिया, लिम्फोमा और मल्टीपल मायलोमा जैसे ब्लड कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाना, शुरुआती संकेतों को पहचानने, समय पर जांच कराने और आधुनिक उपचार अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

डॉ. शेखावत के अनुसार बोन मैरो और रक्त कोशिकाओं में होने वाले आनुवंशिक बदलाव इन बीमारियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अधिकांश मामलों में ब्लड कैंसर का कोई एक निश्चित कारण नहीं होता। लगातार थकान, कमजोरी, खून की कमी, बिना कारण वजन कम होना, बार-बार बुखार या संक्रमण, रात में अत्यधिक पसीना आना, शरीर पर आसानी से नीले निशान पड़ना या रक्तस्राव, त्वचा का पीला पड़ना, लिम्फ नोड्स में सूजन तथा पेट के ऊपरी हिस्से में भारीपन या दर्द इसके संभावित लक्षण हैं। कई बार शुरुआती अवस्था में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। इसलिए लंबे समय तक बने रहने वाले असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

ब्लड कैंसर के उपचार में पिछले वर्षों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। बीमारी के प्रकार और मरीज की स्थिति के अनुसार कीमोथेरेपी, लक्षित उपचार, इम्यूनोथेरेपी, बोन मैरो प्रत्यारोपण और कार-टी सेल थेरेपी जैसे आधुनिक विकल्प उपलब्ध हैं। कार-टी सेल थेरेपी में मरीज की अपनी प्रतिरक्षा कोशिकाओं को प्रयोगशाला में इस तरह तैयार किया जाता है कि वे कैंसर कोशिकाओं की पहचान कर उन पर हमला कर सकें।

डॉ. शेखावत ने बताया कि राज्य में सर्वप्रथम और सर्वाधिक कार-टी सेल थेरेपी करने वाले बीएमसीएच में ब्लड कैंसर उपचार के लिए अलग विंग है। यहां अब तक 191 बोन मैरो प्रत्यारोपण और 9 कार-टी सेल थेरेपी की जा चुकी हैं।

बीएमसीएच के ब्लड कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. उपेंद्र शर्मा ने बताया कि ब्लड कैंसर का उपचार महंगा होने के कारण आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए नियमित उपचार जारी रखना चुनौतीपूर्ण होता है। इसी को देखते हुए बीएमसीएच में दो परियोजनाओं के माध्यम से चार प्रकार के ब्लड कैंसर का संपूर्ण उपचार नि:शुल्क किया जा रहा है।

बच्चों के लिए ‘डोनेट ए लाइफ’ परियोजना के तहत एएलएल, एपीएमएल और हॉजकिन्स लिम्फोमा का नि:शुल्क उपचार किया जा रहा है। वहीं वयस्कों के लिए ‘फ्रीडम फ्रॉम कैंसर’ परियोजना के तहत सीएमएल का नि:शुल्क उपचार उपलब्ध है। दोनों परियोजनाओं में 562 मरीज पंजीकृत हैं, जिनमें 389 मरीज वर्तमान में नियमित उपचार के बाद कैंसर मुक्त जीवन जी रहे हैं। इन योजनाओं के तहत कुल 13.87 करोड़ रुपए खर्च कर जांच, दवाओं सहित संपूर्ण उपचार नि:शुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।

डॉ. शेखावत ने बताया कि ब्लड कैंसर का उपचार बीच में छोड़ना या दवाओं का अनियमित सेवन मरीज के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। कैंसर मुक्त होने के बाद भी मरीज को नियमित रूप से चिकित्सक से परामर्श, आवश्यक जांच और निर्धारित दवाओं का सेवन जारी रखना चाहिए। कई बार मरीज कैंसर मुक्त होने के बाद फॉलोअप के लिए अस्पताल आना बंद कर देते हैं। इससे बीमारी के दोबारा होने की संभावना बढ़ सकती है। ऐसे मामलों में दोबारा मरीज को कैंसर मुक्त करना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

Share this story