अब जांच के बाद ही मंजूर होंगी फसल बीमा पॉलिसियां

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अब जांच के बाद ही मंजूर होंगी फसल बीमा पॉलिसियां


अब जांच के बाद ही मंजूर होंगी फसल बीमा पॉलिसियां


जयपुर, 11 अगस्त (हि.स.)। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के तहत किसानों की फसल बीमा पॉलिसियों के अनुमोदन को लेकर कृषि विभाग ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। खरीफ 2026 से पॉलिसी का अनुमोदन आवश्यक जांच और सत्यापन के बाद ही किया जाएगा। इसका उद्देश्य फसल बीमा में होने वाली गड़बड़ियों और क्लेम के समय सामने आने वाले विवादों को कम करना है।

कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि गैर-ऋणी किसानों की फसल बीमा पॉलिसियों का सत्यापन निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाएगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिसूचित बीमा कंपनी की होगी। उन्होंने बताया कि ऋणी किसानों की पॉलिसी बनाते समय कई बार किसान की सहमति नहीं लेने तथा खेत में वास्तव में बोई गई फसल और बीमा में दर्ज फसल के अलग होने से क्लेम के समय विवाद पैदा होते हैं। इसलिए पॉलिसी के अनुमोदन के समय ही फसल का सत्यापन करना जरूरी किया गया है।

नए प्रावधानों के तहत बीमा कंपनी को किसान के आवेदन, वास्तविक बोई गई फसल और भूमि रिकॉर्ड का मिलान करना होगा। परिचालन मार्गदर्शिका-2023 के प्रावधानों के अनुसार इंश्योरेबल इंटरेस्ट का सत्यापन भी बीमा कंपनी की जिम्मेदारी होगी। इन सभी तथ्यों के सत्यापन के बाद ही पॉलिसी को मंजूरी दी जाएगी।

वास्तविक बोई गई फसल और बीमित फसल का मिलान करने के लिए भौतिक सत्यापन, क्रॉप हेल्थ मॉनिटरिंग सर्वे और तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। यदि किसी आफसल का बीमित क्षेत्र औसत बुवाई क्षेत्र से अधिक पाया जाता है तो संबंधित पॉलिसियों की अनिवार्य रूप से जांच की जाएगी।

निर्देशों की पालना नहीं होने पर राज्य के प्रीमियम अंश का भुगतान भी रोका जा सकता है।

ऐसी स्थिति में जिला कलेक्टर और संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) के समन्वय से ई-गिरदावरी/डीसीएस सर्वे रिपोर्ट प्राप्त कर वास्तविक स्थिति का मिलान किया जाएगा। बीमा कंपनी की मांग पर जिला स्तर के संबंधित अधिकारी रिपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए जिम्मेदार होंगे।

पॉलिसियों के अनुमोदन के लिए निर्धारित समय-सीमा का पालन करना होगा। यदि अनुमोदन में देरी होती है तो ऑटो-अनुमोदन रोकने का अनुरोध किया जा सकेगा। वहीं गलत तरीके से मंजूर हुई पॉलिसियों को जिला स्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी की अनुशंसा पर रिवर्ट करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि गलत पॉलिसी के अनुमोदन से होने वाले किसी भी वित्तीय या अन्य भार की पूरी जिम्मेदारी संबंधित बीमा कंपनी की होगी। कृषि विभाग ने सभी संबंधित बीमा कंपनियों और जिला स्तरीय अधिकारियों को नए दिशा-निर्देशों की सख्ती से पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। पॉलिसियों के अनुमोदन और निरस्तीकरण की रिपोर्ट जिला स्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी के सामने भी प्रस्तुत करनी होगी। विभाग का कहना है कि नए नियमों से फसल बीमा योजना में पारदर्शिता बढ़ेगी, क्लेम संबंधी विवाद कम होंगे और किसानों के हितों की बेहतर सुरक्षा हो सकेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

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